Bollinger Bands Indicator in Hindi

Bollinger bands indicator in Hindi

स्टॉक मार्केट की दुनिया में कीमतों का ऊपर नीचे होना बहुत ही आम है। और जब एक निवेशक/trader अपना पैसा लगाकर मार्केट में प्रॉफिट कमाना चाहता है तो उसे इस उतार-चढ़ाव के कारण बहुत से दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अब अगर आप एक मंझे हुए खिलाड़ी हैं तो आपके लिए उतार-चढ़ाव में पैसा कमाना बहुत आसान होगा। पर अगर आप मार्केट में नए हैं तो आप इंडिकेटर का इस्तेमाल करते हैं। और ऐसा ही एक इंडिकेटर है Bollinger Bands Indicator

Bollinger Bands का इस्तेमाल करके आप मार्केट के अस्थिरता को पता कर सकते हैं। इसे अंग्रेजी में वोलैटिलिटी कहते हैं। Bollinger Bands के इस्तेमाल से आपको यह भी पता चलता है की मार्केट की दिशा किस तरफ होने वाली है। Bollinger Bands से ये भी पता चलता हैं की क्या मार्केट ओवर सोल्ड है या Overbought है। इस आर्टिकल में Bollinger Bands के बारे में बताया गया है। Bollinger Bands क्या होते हैं? Bollinger Bands in Share Market का इस्तेमाल कैसे किया जाता है और शेयर मार्केट में आप Bollinger Bands की मदद से किस तरह से पैसे कमा सकते हैं।

एक बात गौर करने वाली यह है कि कोई भी इंडिकेटर का इस्तेमाल करके आप पैसे नहीं कमा सकते हैं। आपको उसके साथ बहुत सारी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है।  अगर आप सिर्फ और सिर्फ इंडिकेटर के ऊपर भरोसा करके मार्केट में अपना पैसा लगाएंगे तो आपका नुकसान ही होगा। इसीलिए इस चीज को हमेशा ध्यान में रखें कि केवल इंडिकेटर के मदद से आप कोई भी काम ना करें।

Bollinger Bands Meaning in Hindi

जब भी आप किसी शेयर का टेक्निकल एनालिसिस करते हैं तो आपको इंडिकेटर की जरूरत पड़ती है। बोलींजर बैंड्स भी एक टेक्निकल इंडिकेटर है जिसका इस्तेमाल निवेशक और ट्रैडर टेक्निकल एनालिसिस करते वक्त करते हैं। बोलींजर बैंड्स में तीन लाइन होती है जो एक क्षेत्र या बैंड के रूप में दिखाई देती है। इसमे एक लाइन ऊपर होती है, एक बीच में होती है और एक नीचे होती है। ऊपर वाली लाइन को अपर बैंड कहते हैं। बीच वाली लाइन को मिडिल बैंड कहते हैं, और नीचे वाली लाइन को लोअर बैंड कहते हैं। इन तीनों लाइनों का अपना-अपना मतलब है। बीच वाली लाइन सिंपल मूविंग एवरेज है और ऊपर- नीचे वाली लाइन स्टैंडर्ड देविएशन है।

Bollinger Bands कैसे बनता हैं?

जैसा कि अपने ऊपर देखा कि Bollinger Bands में तीन लाइन होती हैं और हर एक लाइन का अपना-अपना मतलब होता है। अगर आप चार्ट पर बोलींजर बैंड्स का इंडिकेटर लगाएंगे तो आपको वहां पर जो डिफॉल्ट सेटिंग रहता है वह 20 और 2 का रहता है। अब जाहिर सी बात है कि इस 20 और 2 का कुछ मतलब होगा। इसी के बारे में नीचे बताया गया हैं जिससे आपको चीजे आसानी से समझ में आ जाए।

Middle Band – Simple Moving Average

Bollinger Bands में जो बीच वाली बैंड है वह एक सिंपल मूविंग एवरेज है जिसकी डिफॉल्ट सेटिंग 20 रहता है। अब इसका अर्थात सिर्फ इतना ही है कि अगर आप इस 20 को ऊपर नीचे करेंगे तो SMA में उतने कैंडल्स का ही कीमत लिया जाएगा। यह बिल्कुल ही गणित का एवरेज के जैसा है। अगर आप 20 दिन का कैंडल का कीमत ले रहे हैं तो आपको एवरेज निकालने के लिए सभी कीमतों को जोड़कर 20 से भाग करना होगा। हर दिन का एवरेज निकाल करके जो लाइन बनेगा वहीं यह सिंपल मूविंग एवरेज की लाइन है। बोलींजर बैंड्स में इसकी डिफॉल्ट सेटिंग 20 रहती है पर इससे आप अपने हिसाब से ऊपर या नीचे कर सकते हैं।

Upper Band और Lower Band – Standard Deviation

Bollinger Bands के ऊपरी और नीचे वाली लाइन Standard Deviation हैं। इससे आपको यह पता चलता है की कीमत अपने एवरेज से कितना ऊपर या कितना नीचे तक जा सकता है। कीमतों की अस्थिरता अनुमान लगाने के लिए Standard Deviation की जरूरत पड़ती हैं। स्टैंडर्ड देविएशन स्टैटिसटिक्स का एक विषय है जिसकी मदद से यह चीज निकल जाता है कि कोई अपने एवरेज से कितना आगे या पीछे तक जा सकता है।

आमतौर पर Bollinger Bands में 2 स्टैंडर्ड देविएशन का इस्तेमाल होता है। ऊपर वाले बैंड के लिए स्टैंडर्ड देविएशन में मीन एवरेज को जोड़ दिया जाता है और नीचे वाले बंद में स्टैंडर्ड देविएशन को एवरेज प्राइस में से घटा दिया जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी शेयर का एवरेज ₹100 आ रहा है और दो स्टैंडर्ड देविएशन ₹10 हुआ तो उसका अपर बैंड जो होगा वह 110 होगा और लोअर बैंड जो होगा वह 90 होगा।

इन तीनों लाइन की मदद से Bollinger Bands बनता हैं। देखिए ये average और standard Deviation निकालने की जरूरत नहीं होती हैं। आपको बस indicators में Bollinger Band चुन कर इसे लगा सकते हैं। आप बस इसमे इसका SMA और Standard Deviation का input कितना लेना हैं वो चुन सकते हैं।

Bollinger Bands की मदद से trade कैसे करें?

Bollinger Bands का इस्तेमाल करने से पहले आपको यह समझना होगा कि बैंड की चौड़ाई कम ज्यादा क्यों हो रही है? या आप यह बोले कि आखिर बैंड की चौड़ाई कम क्यों है और ज्यादा क्यों है? देखिए अगर आप बोलींजर बैंड्स को अच्छे से देखेंगे तो आप देख पाएंगे कि जहां पर कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव है वहां पर बैंड की चौड़ाई बहुत ज्यादा हो गई है। इस चीज का यह मतलब होता है कि उसे समय या उन दिनों में शेयर की कीमतों में वोलैटिलिटी या अस्थिरता बहुत ज्यादा थी। ठीक उसी तरह जब बैंड की चौड़ाई पतली हो गई है तो आप यह कह सकते हैं कि शेयर की कीमतों में ज्यादा उछाल नहीं है और वह शेयर अपने एक रेंज में ऊपर नीचे हो रही है।

किसी भी इंडिकेटर का इस्तेमाल करके ट्रेड करना बिल्कुल भी सही नहीं है पर अगर आप इंडिकेटर के साथ-साथ कुछ और भी चीजों का ध्यान रखेंगे तो आपकी सही होने की उम्मीद बढ़ जाती हैं। नीचे कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु दी गई हैं जिसका इस्तेमाल करके आप सही निर्णय ले पाएंगे।

मार्केट की अस्थिरता की पहचान

जैसा कि अपने ऊपर देखा कि अगर अपर बैंड और लोअर बंद के बीच में ज्यादा गैप है तो आप इसे ऐसे समझे कि उसे समय मार्केट में वोलैटिलिटी ज्यादा है। अर्थात कीमतों में उतार-चढ़ाव बहुत तेजी से हो रहा है। अगर आप एक स्काल्पर हैं तो आप इस उतार चढ़ाओ को आसानी से अपने ट्रेड में शामिल कर सकें। दूसरी तरफ आप इस उतार चढ़ाओ को  स्विंग ट्रेडिंग में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चूंकि Volatility ज्यादा हैं तो रिस्क भी ज्यादा ही होगी और साथ ही साथ प्रॉफ़िट भी ज्यादा होगी। आप अपने रिस्क के हिसाब से यह इस्तेमाल कर सकते हैं।

अब ठीक उसका उल्टा अगर आप देख रहे हैं कि मार्केट में वोलैटिलिटी कम हो गई है तो आप उसका इस्तेमाल करके भी अपने लिए प्रॉफिट कमा सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप ऑप्शंस में ट्रेड करते हैं तो ऑप्शन सेल करके Theta Decay के कारण प्रॉफ़िट का सौदा ले सकते हैं।

जब भी मार्केट बहुत देर तक एक रेंज में फसकर रह जाता हैं। इसे आप ऐसे भी बोल सकते हैं की जब बैंड की चौड़ाई कम हो जाती हैं तो एक breakout होने की संभावना होती हैं। ऐसा दोनों ही तरफ हो सकता हैं। शेयर की कीमत नीचे भी गिर सकती हैं और ऊपर भी जा सकती हैं।

Bollinger Bands से Swing Trading

स्विंग ट्रेडिंग में आप शेयर को सपोर्ट पर खरीद के Resistance पर बेच देते हैं या फिर Resistance पर खरीद के सपोर्ट पर बेच देते हैं। कहने का मतलब यह है कि आप एक स्विंग से प्रॉफिट कमाने की कोशिश करते हैं।

देखिए अगर आपको एवरेज और स्टैंडर्ड देविएशन का एक छोटा सा चीज मालूम होगा तो आपको यह पता होगा कि कोई भी डाटा हो वह ज्यादातर समय अपने +2 और -2 स्टैंडर्ड देविएशन के बीच मे ही रहता हैं। इसे शेयर मार्केट मे समझते हैं – अगर शेयर की कीमत अपने लोअर बैंड से बाहर गई है तो वह अपने लोअर बैंड के अंदर आने की कोशिश करेगी मतलब की वो एवरेज (SMA की लाइन) के पास आने की कोशिश करेगी। इसी तरह अगर शेयर की कीमत अपने अपर बैंड से ऊपर चली गई है तो वह अपने एवरेज के पास मतलब की अपर बैंड से नीचे आने की कोशिश करेगी। ये standard Deviation और Average का मूल मंत्र हैं।

अगर आपको इतना समझ में आ गया है तो आप आसानी से आगे का ट्रेड ले सकते हैं। पर फिर भी एक उदाहरण से चीजों को समझ लेते हैं। किसी भी शेयर को अपर बैंड से ऊपर जाने के लिए एक Uptrend में रहना होगा, उसके बाद ही वह अपने Bollinger Bands की ऊपर वाली लाइन से ऊपर जाएगा। अब जैसा कि आप समझ गए हैं कि वोलैटिलिटी क्या है और कीमत अपने अपर बैंड से ऊपर जा चुकी है तो अब हमें एक ऐसे कैंडल के बनने का इंतजार करना है जो ट्रेंड रिवर्सल का कैंडल हो या कोई चार्ट पेटर्न जो की ट्रेंड रिवर्सल का चार्ट पेटर्न हो। ऐसा हो सकता हैं की पैटर्न एक दो कैंडल आगे पीछे हो। आप बस confirmation का इंतज़ार करिए और आपको यह पता चल जाएगा कि कब ट्रेंड रिवर्सल होने वाला है तो वहां पर आप एक पोजीशन बना सकते हैं और अपने लिए एक ट्रेड ले सकते हैं।  इसी तरह जब कीमत अपने लोअर बैंड से नीचे जाएगी और एक ट्रेंड रिवर्सल का कोई कैंडल्स बने या कोई चार्ट पेटर्न बने तो आप उसका इस्तेमाल करके ट्रेड अपना ले सकते हैं।

Bollinger Bands में Support Resistance और चार्ट पैटर्न

अगर आप टेक्निकल एनालिसिस करते होंगे तो आपको मालूम ही होगा कि कैंडल्स पैटर्न और चार्ट्स पैटर्न कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उसके साथ-साथ Price Action में आपको सपोर्ट और रेजिस्टेंस का भी जानकारी होना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।आप अगर नोटिस करेंगे तो बोलींजर बैंड्स पर भी चार्ट पेटर्न बनता है जैसा की डबल टॉप और डबल बॉटम। आपको ये कहीं-कहीं दिखाई दे देगा। इसका इस्तेमाल करके आप अपना ट्रेड ले सकते हैं और उसके साथ ही आप प्रॉफिट भी कमा पाएंगे।

कई बार ऐसा भी होता है की शेयर की कीमत अपने एवरेज पर या लोअर बैंड पर या अपर बैंड पर एक सपोर्ट लेवल बना लेगा या एक रेजिस्टेंस लेवल बना लेगा तो उस चीज का भी इस्तेमाल करके आप अपने लिए ट्रेड ले सकते हैं।

+1 -1 Standard Deviation का भी इस्तेमाल करना

आमतौर पर अगर कीमत +1 और -1 स्टैन्डर्ड डीवीऐशन के बीच में हैं तो आपको अपना trade नहीं लेना होता हैं। इस समय ज्यादा कुछ होता नहीं हैं और कीमत अपने रेंज में रहकर फस जाती हैं। जैसे की किसी भी तरफ का 1 स्टैन्डर्ड डीवीऐशन टूटे आप वहाँ पर ट्रैड ले सकते हैं।

Bollinger Band Strategy (जरूरी बात)

देखिए बहुत ज्यादा ही जरूरी है कि आप हर एक चीज को बैक टेस्टिंग करिए। आप अपने हिसाब से अपनी स्ट्रेटजी बनाया क्योंकि हो सकता है कि ऊपर के दिए गए हुए स्ट्रैटेजि आपके लिए काम ना करें और ऐसा भी हो सकता है कि वह स्ट्रेटजी किसी के लिए बहुत ज्यादा ही काम आए। तो आपको पहले पूरे विषय को समझना है उसके बाद उसको चार्ट पर देखना है उसके बाद ही अपना निर्णय लेना है।

एक और जरूरी चीज ये हैं की जब भी कीमत अपने बीच वाली लाइन से ऊपर रहती हैं (या अपर बैंड के करीब) तो ऐसा माना जाता हैं की कीमत Overbought ज़ोन में हैं। और वही जब नीचे रहती हैं (या लोअर बैंड के करीब) तो oversold ज़ोन हैं। दोनों ही जगह आप एक reversal की उम्मीद कर सकते हैं।

अंत में

Bollinger Bands एक बहुत ही शानदार टेक्निकल इंडिकेटर है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर सभी ट्रेडर्स और इन्वेस्टर करते हैं। हां यह बात जरूर से ध्यान में रखिए कि सिर्फ एक इंडिकेटर के मदद से आप कोई भी ट्रेड ना ले। आप इसके साथ-साथ और भी इंडिकेटर का इस्तेमाल करें जैसे RSI, ADX, MACD, EMA, Super trend इत्यादि। देखिए आपको सब कुछ आने की जरूरत नहीं है लेकिन जो चीज जरूरी है वह चीज आपको पता होनी ही चाहिए और वो भी अच्छे से पता होना चाहिए।

बिना पूरी जानकारी के कभी भी अपना पैसा निवेश करना मतलब गड्ढे में पैसा फेंक देना के बराबर हैं। इसलिए अगर आप Bollinger Bands का इस्तेमाल करते हैं तो सारी चीजों को समझे। ये Bands काफी शानदार है और अगर आप इसे सही से इस्तेमाल करेंगे तो आपका काफी फायदा होगा। अगर आपको कुछ भी चीज समझ ना आए तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं।

 

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