Crude Oil की कीमत Stock Market को कैसे प्रभावित करती हैं?

crude oil prices

भारतीय शेयर मार्केट में बहुत सी चीजे हैं जो शेयर को ऊपर नीचे करते रहती हैं। कभी कोई खबर आ गया या फिर कोई Scam हुआ या फिर सरकारी नियम ही बदल गई।इन सब चीजों में एक चीज जो सबसे महत्वपूर्ण हैं वो है कच्चे तेल की कीमत। कच्चे तेल का अंग्रेजी अनुवाद Crude Oil होता हैं। बहुत बार इसे सिर्फ Oil बोलकर भी न्यूज और शेयर मार्केट में इस्तेमाल होता हैं। 

देखिए Scam, प्रॉफ़िट नुकसान, नियम कानून  सारी समस्याएं हैं वो भारत की अंदर की बात हैं। कहने का मतलब की अगर किसी कंपनी से संबंधित कोई न्यूज आई हैं तो उस कंपनी की ही बात हैं। ऐसे ही अगर कोई सरकारी नियम बदली गई हैं तो भी वो भारत से ही संबंधित बात हैं। इन सारी चीजों पर एक तरह से हमारा/भारत का कंट्रोल रहते हैं।

Crude Oil या कच्चे तेल को हम बाहर की देशों से खरीदते हैं (Iraq, United States, Nigeria, Saudi Arabia, UAE इत्यादि) और इसलिए इनकी कीमतों पर हमारा उतना कंट्रोल नहीं रहता हैं। जब कच्चे तेल की खपत की बात आती हैं तो भारत पूरी दुनिया में तीसरी नंबर में आता हैं। पहले पर अमेरिका और दूसरे पर चीन हैं। FY23 में भारत ने 223 मिलियन टन तेल का इस्तेमाल किया हैं। ये पिछले साल, FY22 से 10% ज्यादा हैं। भारत अपनी जरूरतों का 85% तेल बाहर से खरीदता हैं। अब चूंकि भारत Crude Oil बाहर से खरीदता हैं तो इसलिए Crude Oil Prices में जरा सी भी हलचल होने से हमारी Economic ग्रोथ पर असर दिखता हैं। 

कच्चे तेल की कीमतें शेयर बाजार को कैसे प्रभावित करती हैं?

अगर आपको आसानी से ऊपर ऊपर से समझाया जाए तो अगर तेल की कीमत ज्यादा होगी तो किसी कंपनी की raw materials की कीमत बढ़ जाएगी। अब ऐसा इसलिए क्यूंकी बहुत से ऐसे sectors हैं जो पूरी तरह से Crude Oil पर ही निर्भर करते हैं जैसे की Paint, Tyres, Aviation, Oil Refineries, Fast Moving Consumer Goods (FMCG), Auto, Cosmetics, Real Estate, Petrochemicals इत्यादि। इसके अलावा भारत में Transportation पूरी तरह से तेल पर ही निर्भर होता हैं। तो अगर तेल के दाम बढ़ेंगे तो Operating Profit कम हो जाएगी। प्रॉफ़िट कम होगा मतलब Growth नहीं होगा। और Growth नहीं होगा तो उसका असर आपको शेयर मार्केट में दिखेगा।

ठीक इसका उलटा भी होगा जब Crude Oil की कीमत कम होगी। Input Cost कम होगी तो प्रॉफ़िट ज्यादा होगी। और प्रॉफ़िट ज्यादा होगी तो मार्केट आगे बढ़ेगा।

यहाँ पर एक बात गौर करने वाली हैं की सिर्फ वो ही कंपनी प्रभावित होंगे जो सीधे या किसी और तरह से Crude Oil Prices पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए IT कंपनी का का तेल से कोई संबंध नहीं हैं। हालांकि बिजली बनाने के लिए भी तेल का इस्तेमाल होता हैं, पर उसका असर IT कंपनी के ऊपर नहीं दिखाई देगा।

आप उदाहरण के लिए Crude Oil की कीमत को Asian Paints, Indian Oil, MRF, Indigo Airlines, SpiceJet, Berger Paints, CEAT, Pidilite, 3M India, VRL Logistics इत्यादि जैसे कंपनी से तुलना कर सकते है। ध्यान रखने वाली बात ये हैं की ऐसा कही लिखा हुआ हैं नहीं की असर होगा ही पर ज़्यादतर उम्मीद यही होती हैं।

कुल मिलाकर बात ये हैं की कच्चे तेल की कीमत में अगर उछाल आता है तो हमारे शेयर मार्केट में भी इसका असर दिखाई देगा। गौर करिएगा की ऐसा हो सकता हैं की Nifty 50 या Sensex ज्यादा ना हीले पर कुछ Sectors को तेल ऊपर नीचे कर ही देगा।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से क्या होता हैं?

अगर आप एक कंपनी चलाने की मानसिकता से चीजों को analyze करेंगे तो आप Crude Oil की कीमत का सारा खेल समझ जाएंगे। आप नीचे कुछ महत्वपूर्ण चीजे देख सकते हैं:

Input Cost बढ़ जाएगा

जैसा की बहुत सी sectors ऐसे हैं जो Crude Oil Price से सीधा संबंध रखती हैं। अगर तेल के दाम बढ़ेंगे तो raw materials के साथ साथ production cost भी बढ़ जाएगा। ऐसा होने से कंपनी का Operating Cost बढ़ेगा और कही ना कही profit के ऊपर दिखाई देगा। अगर कंपनी की profit में कमी आई तो ग्रोथ की उम्मीद नहीं दिखाई देगी जिसका सीधा असर कंपनी के शेयर पर दिखेगा।

Transportation Cost बढ़ेगा

जैसा की आप समझते ही हैं की भारत में कच्चे तेल का कितना इस्तेमाल होता हैं। हर एक जगह किसी ना किसी तरीके से कच्चे तेल का इस्तेमाल होता हैं। अब चाहे वो Vaseline हो या फिर हवाई जहाज का तेल। अगर Crude Oil की कीमत बढ़ी तो Raw Material तो महंगा हुआ ही पर साथ ही साथ उसको इधर उधर ले जाने का भी खर्चा तो बढ़ेगा जो की अंत में किसी कंपनी के प्रॉफ़िट में दिखाई देगा। कम प्रॉफ़िट होगा तो उसके बाद शेयर में भी दिखेगा।

Inflation बढ़ेगा

जाहीर सी बात हैं अगर कंपनी की production की कीमत बढ़ेगी तो वो अंत में Consumer मतलब हम और आप से ही वसूलेगा। जितना ज्यादा Crude Oil की कीमत में बढ़ोतरी उतनी ज्यादा Inflation। वैसे Inflation बढ़ने के और भी बहुत से कारण हो सकते हैं। ऐसा नहीं है की सिर्फ Crude Oil Prices में बढ़ोतरी से ही inflation बढ़त हैं। हर 10% की बढ़ोतरी के लिए CPI 0.4-0.6% से बढ़ जाता हैं

Current Account Deficit बढ़ेगा और रुपया की Value कम हो जाएगी

किसी भी देश में सब कुछ उपलब्ध नहीं होता हैं। भारत में भी सब कुछ का उत्पादन नहीं हैं। और इसलिए भारत ऐसी चीजों को बाहर से खरीदता हैं। Crude Oil के सम्बद्ध में भारत बहुत से देशों से तेल को खरीदता हैं और इसका भुगतान भारत को ज्यादातर वक्त डॉलर में करना पड़ता हैं। ऐसे में अगर कीमतें बढ़ गई तो भारत की Current Account Deficit बढ़ेगी क्यूंकी उसे ज्यादा पैसा देना पड़ेगा। अगर Imports ज्यादा हैं तब कोई बात नहीं हैं।

इसका असर रुपया पर भी पड़ता हैं। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। अगर किसी देश की कुल Imports की कीमत उसके Exports की कीमत से ज्यादा होगी तो उस देश को अपने पैसे को Exchange करके उसका भुगतान करना पड़ेगा। दुनिया में Oil की payment dollars में की जाती हैं। इसलिए आपने देखा भी होगा की एक barrel की कीमत 100$-110$ होती हैं।

अगर कीमतें बढ़ी तो सरकार को ज्यादा Dollars देना पड़ेगा, जो की सरकार या तो मार्केट से खरीद कर दे सकती हैं या फिर विदेशी करन्सी की रिजर्व से दे सकती हैं। दोनों ही तरीकों में डॉलर की Demand बढ़ी और शेयर मार्केट का तो नियम ही यही हैं की जिसका Demand ज्यादा उसकी कीमत ज्यादा और जिसकी Supply ज्यादा उसकी कीमत कम। यहाँ पर रुपया बेचकर डॉलर खरीद गया तो रुपया का Supply बढ़ गया और उसकी Value कम हो गई।

एक निवेशक क्या करें?

एक निवेशक के तौर पर आपको ये पता होना चाहिए की आप जिस कंपनी में निवेश कर रहे हैं उसका काम क्या हैं। उदाहरण के लिए अगर आप किसी बैंक की शेयर खरीदते हैं तो आपको बैंक के कम काज के बारे में थोड़ी जानकारी होनी ही चाहिए। ठीक उसी तरह आप अगर एक Crude Oil से संबधित शेयर खरीदते हैं तो आपको मालूम होना ही चाहिए की कंपनी कैसे और कितना Crude के ऊपर निर्भर करती हैं।

इसके अलावा आपको Crude Oil Prices के बढ़ने या घटने का कारण पता करना चाहिए। ऐसा भी होता हैं की किसी बेतुकी कारण से दाम बढ़ा दिए गए हो और ऐसा भी होता हैं की कोई सही कारण हो। आपको उस जड़ को पकड़ना हैं उसके बाद ही अपने निवेश को बेचने या खरीदने के बारे में सोचना हैं।

अंत में

भारत जैसे देश में जहा Crude Oil की इतनी ज्यादा खपत हैं, अगर तेल की कीमत बढ़ जाती हैं तो पूरे देश को कही न कही नुकसान होता हैं। सब्जी से लेकर टायर तक सब महंगा हो जाता हैं। ऐसा इसलिए हैं क्यूंकी भारत के पास और अन्य साधन नहीं हैं। अगर भारत साफ ऊर्जा के तरफ काम करता हैं तो आने वाले समय में भारत का तेल के ऊपर निर्भर रहना कम होगा। जब तेल की जरूरत कम होगी तो हमारे Economy को तेल के दामों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।

देखिए एक चीज जो गौर करने वाली हैं की तेल के दाम बढ़ने से पूरा शेयर मार्केट नहीं गिरेगा। बस कुछ शेयर को नुकसान होगा और कुछ नहीं। आप तेल के कीमतों को track करके भी अपने निवेश की planning कर सकते हैं।

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