डॉलर के मुकाबले रुपया क्यूँ गिरता हैं? USD vs INR?

usd vs inr

बहुत से लोग ऐसा चाहते हैं की वो डॉलर में कमाए और रुपये में खर्च करें। आज की तारिक में एक डॉलर 83 रुपये के बराबर हैं। 3 साल पहले एक डॉलर 72 रुपये के आस पास था और आज तकरीबन 13 -15% बढ़ गया हैं। इसलिए ये तो साफ है की लोग डॉलर में कमाना क्यूँ चाहते हैं। पर भारत के लिए ये सही नहीं हैं की रुपया की औकात ऐसे कम होते रहे। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जितना डॉलर मजबूत होगा उतना ही हमारा रुपया कमजोर होगा।

एक देश की currency उसकी सम्मान होती हैं, और जितना हमारी देश की रुपया मजबूत होगा उतना ही हमारे देश का मान बढ़ेगा। ऐसे तो बहुत से कारण हैं जिसके वजह से हमारा रुपया कमजोर होता हैं। पर इस लेख में कुछ महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं।

आगे बढ़ने से पहले आपको एक आसान सा विषय समझना होगा। शेयर बाजार में जो बहुत ही महत्वपूर्ण नियम चलता हैं जो हैं Demand और Supply। अगर किसी चीज की Demand ज्यादा हैं और Supply कम हैं तो उसकी कीमत ज्यादा होगी और अगर Demand कम हैं और Supply ज्यादा हैं तो कीमत कम होगी। Demand और Supply किसी भी चीज की कीमत को निर्धारित करते हैं।

USD vs INR: Inflation

Inflation का मतलब हैं महंगाई। जिस रेट से चीजों के दाम में बढ़ोतरी होती हैं उसी को हम Inflation कहते हैं। कुछ साल पहले तक 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 70 रुपये थी पर आज 100 के पार हैं। ये जो कीमत में बढ़ोतरी हुई हैं यही Inflation हैं।

जैसे जैसे Inflation बढ़ेगा वैसे वैसे रुपया कमजोर होते जाएगा। एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए भारत में Inflation 5 % से बढ़ गया और वही America में 3% से बढ़ता हैं। आज के तारिक में 1 डॉलर = 83 रुपया हैं (approx.)। मतलब 5% Inflation के बाद भारतीय रुपया 4.15+83=87.15 रुपया। वही दूसरी तरफ 3% Inflation के बाद 1 + 0.03 = 1.03 डॉलर। अब अगर 1 USD to INR करेंगे तो वो 87.15/1.03 = 84.611 रुपया आता हैं। आप नीचे इसे देख सकते हैं।

  • 1 $ = 83 रुपये
  • 5 % Inflation 83 रुपये पर = 87.15 रुपया
  • 3 % Inflation 1 डॉलर पर = 1.03 $
  • 1.03 $ = 87.15 रुपया तो 1 $ = 84.61 रुपया

आप इसे दोनों देशों में किसी Product की कीमत को लेकर भी समझ सकते हैं। मुख्य बात ये हैं की चूंकि डॉलर मजबूत हैं तो उस पर inflation ज्यादा हुआ तो रुपया और गिरेगा।

USD vs INR: Exports और Imports

अगर आपको Demand और Supply मालूम हैं तो आपको ये भी मालूम होगा की जिसकी Demand ज्यादा होगी उसकी कीमत ज्यादा होगी। Exports और Imports में क्या होता हैं की अगर भारत कुछ भी बाहर से Import करता हैं तो उसे उसकी कीमत डॉलर में चुकानी पड़ती हैं। अब ऐसा इसलिए क्यूंकी बहुत से देश में डॉलर एक मुख्य currency के रूप में इस्तेमाल होता हैं। उदाहरण के लिए भारत विदेशों से तेल बहुत खरीदता हैं और वैसे में चूंकि हमे डॉलर में भुगतान करना हैं तो डॉलर की Demand बढ़ती हैं।

वही दूसरी तरफ बहुत सी ऐसे चीजे हैं जो भारत Export करता हैं जैसे की मसाले, IT सेवाएँ इत्यादि। अब इसके payment ज्यादातर समय हमे डॉलर में ही लेनी पड़ती हैं।अगर हमारे पास उतने Exports नहीं होंगे जीतने हमने Imports किए हैं तो हमे उस Imports की भुगतान करने के लिए बाजार से डॉलर खरीदना पड़ेगा । ऐसे में हम अपने रुपया खर्च करेंगे। अब विश्व बाजार में रुपया का Supply बढ़ा और Dollar की Demand बढ़ी और इसलिए हमारा रुपया कमजोर हुआ और डॉलर मजबूत हुआ।

इसलिए भारत आज की तारिक में बहुत से देशों के साथ रुपये में ही Trade करने के लिए कहता हैं। ताकि रुपया की Demand बढ़े और रुपया मजबूत हो। इस Exports और Imports में जो अंतर हैं उसे Current Account Deficit कहते हैं।

USD vs INR: Interest Rates

ये बैंक वाला ब्याज दर ही हैं। पर भी उदाहरण के लिए – Interest Rate का मतलब हैं की अगर आपको 7% का Interest Rate मिल रहा हैं तो आपको हर 100 रुपये में 7 रुपये मिलेंगे। देखिए अगर भारत में एक अच्छा ब्याज दर मिल रहा हैं तो विदेश वाले लोग भारत के अंदर अपना पैसा निवेश करेंगे और ऐसे करने के लिए उन्हे रुपये का इस्तेमाल करना पड़ेगा। रुपया का इस्तेमाल मतलब की रुपया की Demand बढ़ेगी और फिर हमारा रुपया मजबूत होगा। ठीक इसका उलटा अगर ब्याज दर कम होगी तो एक तो ये होगा की जो लोग निवेश किए हैं वो रुपया बेच कर निकल लेंगे और दूसरा ये की बाहर से हमारे पास डॉलर नहीं आएगा।

वही दूसरी तरफ अगर दूसरे देश के ब्याज दर हमसे अच्छे हुए तो निवेशक वहाँ निवेश करेंगे और डॉलर मजबूत होगा। जितना डॉलर मजबूत उतना रुपया कमजोर।

USD vs INR: Salary

अगर कोई इंसान विदेश में काम कर रहा हैं और अपनी सैलरी को भारत भेजता हैं तो उस डॉलर/Currency को भारत में इस्तेमाल करने के लिए उसे रुपया में Exchange करना पड़ेगा। रुपये में Exchange करने का मतलब हैं की उसे रुपया खरीदना होगा और वो currency/डॉलर बेचना होगा। ऐसे में रुपये की Demand बढ़ेगी और रुपया मजबूत होगा।

USD vs INR: Economic Growth

बहुत से ऐसे Economic कारण हैं जो किसी Currency के गिरने का कारण बन सकता हैं। जंग जैसी परिस्थिति में दुनिया की ईकानमी धीरी हो जाती हैं और जिसका हमारे Currency के ऊपर भी असर पड़ता हैं। उदाहरण के लिए – अगर हमारे Exports किसी कारण से (War, Sanctions, दूसरे देशों के साथ सम्बद्ध) कम हो जाते हैं तो इससे हमारी Currency गिरने लगेगी। वही दूसरी तरफ अगर दुनिया की इकनॉमिक growth अच्छी हैं और हमारी growth उतनी अच्छी नहीं हैं उसका भी असर हमारे रुपया पर पड़ता हैं।

USD vs INR: Gold और तेल

भारत में तेल और सोना बहुत ज्यादा खपत होता हैं। इन दोनों ही Commodity को हम बाहर से Import करते हैं। अगर किसी परिस्थिति में सोना या तेल (जंग के दौरान) के दाम बढ़ते हैं तो हमे ज्यादा Dollars की जरूरत पड़ती हैं सोना या तेल को खरीदने के लिए। चूंकि ज्यादातर देश में डॉलर को ही एक international Currency के रूप में इस्तेमाल होता हैं इसलिए Dollar की demand बढ़ती है और डॉलर मजबूत होता हैं। जितना ज्यादा डॉलर मजबूत होगा उतना ज्यादा हमारा रुपया गिरेगा।

इसलिए आपने Russia- Ukraine War और Israel Palestine War के समय तेल के दामों को लेकर बहुत सी बातें सुनी होंगी। और कैसे तेल के दाम बढ़ने से हमारे पूरे economy पर कितना असर पड़ता हैं।

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