GDP क्या होता हैं? GDP और शेयर मार्केट में क्या संबंध हैं?

impact of gdp on share market

शेयर मार्केट और finance की दुनिया में बहुत से ऐसे subjects और शब्द हैं जिसकी जानकारी से एक निवेशक और भी जागरूक बनाता हैं। ऐसा ही एक विषय हैं GDP। आपने कई बार ऐसा सुना होगा की मार्केट का ग्रोथ GDP growth के ऊपर निर्भर करता हैं। रिपोर्ट्स का माना जाए तो भारत अगले कुछ सालों में दुनिया का तीसरा बड़ा इकोनॉमी बन जायेगा। GDP के मामले में अभी भारत पांचवे नंबर पर हैं। GDP किसी भी देश की economic स्थिति को बताता हैं। अगर GDP का ग्रोथ अच्छा हैं तो इकोनॉमी भी अच्छे रास्ते पर हैं जिसके कारण शेयर मार्केट भी ऊपर की और जाता हैं। आपको इतना तो समझ आ गया होगा की GDP महत्वपूर्ण तो हैं और इसलिए इस आर्टिकल में GDP क्या होता हैं? GDP का शेयर मार्केट में क्या असर पड़ता हैं? GDP और शेयर मार्केट में क्या संबंध हैं इत्यादि के बारे में बताया गया हैं।

GDP क्या होता हैं?

GDP का फुल फॉर्म Gross Domestic Product होता हैं। ये किसी देश की सभी products और services की कुल मौद्रिक मूल्य होता हैं। GDP को हमेशा एक साल की समय सीमा में निकाला जाता हैं। वैसे ये तीन महीने पर भी निकाल सकते हैं। GDP से ये पता चलता हैं की देश की economy कितना बड़ा हैं। आप GDP की तुलना करके देश की विकास के बारे में पता कर सकते हैं। GDP को एक सरल उदाहरण से समझते हैं।

उदहारण के लिए – मान लीजिए आप कही पर काम करते हैं और 1 लाख रुपए कमाते हैं, आपके परिवार में आपका पार्टनर भी कुछ 50 हजार कमाते हैं, और आपके बच्चे भी कुछ काम करके 20 हजार कमा लेते हैं। ऐसे में आपका महीने का GDP 1 लाख 70 हजार हो जायेगा। इसी तरह आप पूरे साल का GDP निकाल सकते हैं।

ऐसे ही आप पूरे देश का Income जोड़कर GDP निकाल सकते हैं। ये तो एक तरीका हो गया GDP निकालने का, इसके अलावा GDP और 2 तरीके से निकाला जाता हैं।

GDP कैसे निकाला जाता हैं?

GDP मुख्य रूप से तीन तरीकों से निकाला जाता हैं – Income के जरिए, Expenditure के जरिए और Production (Output) के जरिए।

Income GDP

ऊपर के उदाहरण में जिस तरह GDP निकाला गया हैं उसे ही हम GDI बोलते हैं। इसी तरह अगर हम एक देश की कमाई के मदद से GDP निकालते हैं। देश का GDP के लिए देश की इनकम को जोड़ा जाता हैं।

GDP= कुल इनकम (सैलरी, प्रॉफिट) + टैक्स + rents + depreciation + अन्य आय

जब भी GDP को इनकम के जरिए निकाला जाता हैं तो इसे GDI या Gross Domestic Income ya GDP (I) बोला जाता हैं।

Expenditure GDP

अगर आप महीने में 1 लाख रुपया खर्च करते हैं तो आपकी GDP उतनी हो जाएगी। ठीक उसी तरह एक साल में जो भी सरकार ने खर्च किए, आपने और हमने खर्च, अलग अलग बिजनेस ने खर्च किए इत्यादि को जोड़कर Expenditure की मदद से GDP निकाला जाता हैं। इसकी फॉर्मूला आप नीचे देख सकते हैं।

GDP= खपत व्यय+ सरकारी व्यय+ निवेश+ कुल निर्यात

खपत व्यय = Consumer Expenditure (C)
सरकारी व्यय = Goverment Expenditure (G)
निवेश= Investments (I)
कुल निर्यात = Net Exports (NX)

Output GDP

अगर किसी सामान या service की अंतिम कीमत को जोड़कर GDP निकाला जाए तो उसे हम Output या Production की मदद से निकाला गया GDP बोलेंगे। समान की सिर्फ अंतिम कीमत को ही जोड़ा जाता हैं GDP निकालने के लिए। उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने 10 हजार में कोई मोबाईल फोन खरीदा तो उस 10 हजार को जोड़कर ही GDP निकाला जाएगा, ना की वो सामान जो उसमे इस्तेमाल किए गए। ठीक इसी तरह एक देश की पूरी Output को निकालकर GDP का हिसाब किया जाता हैं।

GDP कितने प्रकार का होता हैं?

GDP दो तरह के होते हैं। एक Nominal GDP और दूसरा Real GDP। इन दोनों में बस inflation का फर्क हैं। Nominal जो आपका हिसाब करके निकला और दूसरा जो inflation के कारण कीमतों में वृद्धि हुई उसे घटाने के बाद निकला।

Real GDP

जब GDP को inflation की वजह से कीमतों में हुई वृद्धि को घटा कर निकाल जाता हैं तो उसे हम Real GDP कहते हैं। इस inflation को हम एक Base Year की तुलना कर के हिसाब करते हैं। अभी भारत में Real GDP निकालने के लिए Base Year 2011-12 हैं। Advisory Committee on National Accounts Statistics (ACNAS)  ने इस base year को 2020-21 करने का प्रस्ताव दिया हैं।

Real GDP growth पता करने का एक ज्यादा सटीक तरीका हैं। उदाहरण के लिए अगर आपकी कोई कंपनी हैं जो हर साल 10 पेन बनाती हैं और उसे 100 रुपये में बेचती हैं। अब ऐसे में आपका कुल इंकम 1000 रुपये हो गया। अगले साल हो सकता हैं inflation के कारण वो पेन 110 रुपये मिले और आपकी इंकम 1100 रुपये हो जाएगा। अब ऐसे में अगर आप देखेंगे तो 10% growth हैं। लेकिन क्या सच में Output बढ़ा हैं क्या? पहले भी 10 बनाते थे और अभी भी 10 बना रहे हैं। इसलिए ये सही तरीका नहीं हैं GDP निकालने का और इसलिए GDP में से Inflation को घटाया जाता हैं ताकि सच में growth हो रहा हैं की नहीं ये पता चल सके।

Nominal GDP

Nominal GDP में inflation को नहीं घटाया जाता हैं। इसका उतना ज्यादा इस्तेमाल होता नहीं हैं पर Real GDP तभी निकलेगा जब Nominal GDP पता होगा। देखिए ये जरूरी हैं की Real GDP का हिसाब करते वक्त inflation को घटाया जाता हैं पर अगर deflation हो गया तो? इसलिए ये चीज समझिए की चाहे Inflation हो या Deflation दोनों का हिसाब करके ही Real GDP निकलता हैं।

GDP Per Capita

जब GDP को भारत के जनसंख्या से भाग कर दिया जाता हैं तो GDP Per Capita निकलता हैं। मतलब की एक आदमी का GDP कितना हैं ये GDP Per Capita से पता चलता हैं।

GDP Per Capita = GDP/ Population

2021 में भारत की Nominal Per Capital GDP US $ 2,256.59 थी।

GDP ग्रोथ रेट

नाम से ही पता चलता हैं की पिछेल साल की तुलना में इस साल का कितना GDP होगा। FICCI Economic Outlook Survey के मुताबिक भारत की FY 2023-24 में GDP ग्रोथ 6.3 per cent होगा।

ग्रोथ रेट को हर कॉर्टर के हिसाब से भी निकाल सकते हैं। जब भी GDP ग्रोथ रेट कम होती हैं की तो ऐसा अनुमान लगाया जा सकता हैं की आने वाले समय में recession आ सकता हैं।

GDP Growth शेयर मार्केट पर क्या असर डालती हैं?

GDP किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को analyze करने का अच्छा तरीका हैं। आप GDP की मदद से भारत की Financial स्थिति का आकलन कर सकते हैं। अगर GDP की ग्रोथ positive हैं तो वो हमारे economy के लिए अच्छी बात हैं। GDP बढ़ने का एक मतलब है की बिजनस वैगर सब अच्छा कमाई कर रहे हैं। जब बिजनस अच्छा कमाई करेगा तो कंपनी को प्रॉफ़िट होगा जो शेयर होल्डर्स के लिए अच्छी बात हैं।

ठीक इसका विपरीत अगर GDP का growth रेट कम हैं और GDP नीचे जा रहा हैं इसका मतलब आने वाले समय में दिक्कतें बढ़ेंगी और निवेशक अपना पैसा लेकर छु मंतर होने के सोचेंगे जो की शेयर मार्केट के लिए अच्छी बात नहीं हैं। ये तो हुआ ऊपर ऊपर से की Growth के हिसाब से मार्केट कैसे बर्ताव करेगी। कुछ जरूरी चीजे नीचे दी गई हैं।

  • FII का और निवेश – देखिए जब भी किसी देश की ईकानमी अच्छी होती हैं, वैसे में growth की उम्मीद बहुत होती हैं। और इसलिए विदेशों के निवेशक उस देश में निवेश करने के लिए तैयार होते हैं। अब अगर भारत में ही FIIs ज्यादा निवेश करने लगे तो मार्केट कहा जाएगा इसका अंदाजा आप आसानी से लगा सकते हैं। इसका विपिरित भी होता हैं जो की मार्केट के लिए अच्छी बात नहीं हैं।
  • DIIs का निवेश – सीधी सी बात हैं, जो मानसिकता FIIs की रहती हैं उसी तरह से DIIs भी काम करते हैं। देखिए बाजार में सब पैसा कमाने के लिए निवेश करते हैं और इसलिए अगर भारत की economy ऊपर जाएगी तो मार्केट भी ऊपर जाएगा।
  • देखिए चाहे वो इंकम में बढ़ोतरी हो, Expenditure (खपत) में बढ़ोतरी हो या फिर Output ज्यादा हो। तीनों ही तरीके में कंपनी/सरकार/आम आदमी का विकाश होता हैं। और जब भी विकाश होता हैं तो कंपनी को प्रॉफ़िट होता हैं जो शेयर मार्केट में दिखाई देता हैं।

GDP और शेयर मार्केट दोनों एक साथ ही चलते हैं। अगर देश की GDP बढ़ रही हैं तो आम तौर पर शेयर मार्केट भी ऊपर ही जाएगा। ऐसा बहुत कम ही होगा की GDP और शेयर मार्केट उल्टा बर्ताव करें। उदाहरण के लिए आप जंग के समय में शेयर मार्केट का बर्ताव देख सकते हैं। पर ये चीज ऐसी हैं की वो छोटे समय के लिए मान्य हैं। अगर आप लंबे समय के निवेशक हैं तो ऐसा लगभग तय हैं की जैसे जैसे GDP बढ़ेगा वैसे वैसे मार्केट भी ऊपर ही जाएगा।

अंत में

किसी भी देश के स्थिति जानने के लिए GDP देखा जाता हैं। ये एक ऐसा साधन हैं जिसकी मदद से आप खुद को नंबर दे सकते हैं। इसके अलावा आप देश विदेश सबकी GDP का तुलना करके ये भी पता कर सकते हैं की कौन से देश में कितना तरक्की हो रहा हैं। सरकारी नियम कानून भी GDP के ग्रोथ के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए अगर आप एक निवेशक हैं तो आपके लिए GDP के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Index