Mutual Fund में कम Expense Ratio मतलब ज्यादा प्रॉफ़िट

Expense Ratio Meaning in Hindi

शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए Mutual Funds का रास्ता बहुत ही अच्छा हैं। आप छोटे राशि से भी अपने निवेश की दुनिया को शुरू कर सकते हैं। लेकिन Mutual Funds के एक बहुत ही जरूरी चीज बहुत से लोग नजरंदाज कर देते हैं।

Mutual Fund में Expense Ratio बोलकर एक चीज होता हैं जो की आपके कुल रिटर्न को बहुत कम कर सकता हैं। हर एक Mutual Fund का अपना Expense Ratio होता हैं। इस लेख में Mutual Funds में Expense Ratio क्या होता हैं उसके बारे में बताया गया हैं। इसके अलावा एक निवेशक के तौर पर आपको कम Expense Ratio वाले Mutual Funds क्यू चुनना चाहिए वो भी बताया गया हैं।

Total Expense Ratio (TER) क्या होता हैं ?

Total Expense Ratio (TER) जिसे आम तौर पर Expense Ratio भी कहते हैं एक तरह का फीस होती हैं जो Mutual Fund कंपनी (AMC- Asset Management Company) अपने निवेशक से लेती हैं।

जैसा की हर Mutual Fund कंपनी की टीम होती हैं जिसमे निवेश के दुनिया के experts और professionals होते हैं। अब ये टीम आपके पैसे को manage कर रही हैं ताकि आपको ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिले। इस टीम या ऐसे बोलिए की Mutual Fund कंपनी अपने खर्चे निकालने के लिए निवेशको के पैसे में से कुछ पैसा काट कर ही निवेश करती हैं।

ये जो पैसा काटा गया हैं वो ही Expense Ratio होती हैं। अलग अलग Mutual Fund के अलग अलग Expense Ratio होते हैं और ये आमतौर पर 2% तक रहता हैं।

उदाहरण के लिए Nippon India Large Cap Fund – Direct Plan का expense Ratio 0.9% और इसी का Regular Plan का Expense Ratio 1.72% हैं। ये दोनों एक ही Mutual Fund हैं बस एक Direct Plan हैं और एक Regular Plan हैं। आप किसी भी trading website पर जाकर किसी भी Mutual Fund का Expense Ratio देख सकते हैं।

AMC का Expense Ratio कैसे निकाला जाता हैं

किसी Mutual Fund कंपनी या AMC का Expense Ratio निकालने के लिए आपको उस Mutual Fund कंपनी के कुल खर्चे को Asset Under Management से भाग करना होगा। इसका फार्मूला हैं Expense Ratio = AUM/कुल खर्चे। अब जाहीर सी बात हैं की क्या क्या खर्चे किसी कंपनी के हो सकते हैं? नीचे कुछ खर्चे दिए गए हैं

Admin Expenses: जैसा की हर Mutual Fund में कुछ Fund Manager होते हैं। इन Fund Managers को अपने अनुभव और कार्य के हिसाब से सैलरी देना। इसके अलावा कोई और कर्मचारी हैं उनके सैलरी, ऑफिस के खर्चे, रिसर्च में खर्चे। इन सब से Admin Expenses बनता हैं।

अन्य खर्चे: जैसे की ये Mutual Fund कंपनी इतने सारे निवेशकों का पैसा मैनेज कर रही हैं और ये एक बिजनस ही हैं। आपको तो मालूम ही होगा की एक बिजनस चलाने के लिए सरकार के 50 तरह के नियम (जैसे की फंड हाउस ट्रांसफर और रजिस्ट्रेशन, कस्टोडियन, कानूनी नियम) को मानना पड़ता हैं। इन सब कार्य में जो खर्च होता हैं वो कंपनी के खर्चे ही हैं।

मार्केटिंग में खर्चे: Sales commissions, marketing खर्चे, किसी तीसरी पार्टी के खर्चे जो फंड बेच रहा हो।

इन सब के अलावा भी एक Mutual Fund कंपनी के खर्चे हो सकते हैं। अब आप ये भी बोल सकते हैं की ये तो नाम से लग रहा हैं की एक Ratio हैं, तो असल में ये एक Ratio ही हैं जिसमे ऊपर में कुल खर्चे और नीचे में AUM रहता हैं। उदाहरण के लिए मान लेते हैं कोई कंपनी के AUM 7000 करोड़ हैं और उसके खर्चे 140 करोड़ हैं तो उस कंपनी का Expense Ratio होगा

Expense Ratio = 140/7000 = 2%

खैर Expense Ratio कैसे निकलता हैं वो एक निवेशक के लिए उतना मायने नहीं रखता हैं। जरूरी ये हैं की Expense Ratio कम ज्यादा होने पर क्या Return में फर्क पड़ता हैं।

Expense Ratio का हिसाब कैसे होता हैं

Expense Ratio का हिसाब एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप 10 हजार रुपये किसी Mutual Fund में निवेश करते हैं। आपको इस 10 हजार पर 12% रिटर्न का मिलता हैं और आप इसे एक साल के करते हैं, तो अब आपका हिसाब कैसे होगा:

कुल निवेश10000
कुल रिटर्न11200
कुल प्रॉफ़िट1200
Expense Ratio2% सालाना
Expense Ratio कितना कटा224 (11200 का 2%)
नेट रिटर्न11200-224 = 10976
नेट प्रॉफ़िट976 (9.76%)

इसके बाद आपको STGC या LTGC tax देना होगा जो भी इस case में होगा। यहाँ पर आपको प्रॉफ़िट हुआ 1200 उसमे से आप 224 रुपया फीस दे दिए। इसका मतलब हैं की आपने अपने प्रॉफ़िट का 18.66% तो फीस ही दे दिए। देखिए ये बस समझने के लिए था की Expense Ratio का Concept क्या हैं और क्यू जरूरी हैं की आप  निवेश करते समय Expense Ratio को देखिए की वो कितना हैं।

पर असली में Expense Ratio सालाना जैसे की ऊपर बताया गया हैं वैसे नहीं काटा जाता हैं। ये हर दिन काटा जाता हैं और इसका हिसाब नीचे दिया गया हैं। फिर से यही उदाहरण ले लेते हैं की आपने 10000 रुपये निवेश किए हैं। पर चूंकि ये हर दिन काटा जाता हैं तो हम मान लेते हैं की आप 19.09.2023 को निवेश करते हैं।

दिनांक कुल निवेश की राशि Expense Ratio @2%
19.09.202310000(2%/365) x 10000 = 0.5479 रुपया
20.10.202310200(2%/365) x 10200 = 0.5589 रुपया
05.12.20239500(2%/365) x 9500   = 0.5205 रुपया
02.03.202412000(2%/365) x 12000 = 0.6575 रुपया

देखिए जैसा का हर दिन Mutual Fund का NAV ऊपर नीचे होगा ठीक उसी तरह आपका जो निवेश किया हुआ पैसा भी ऊपर नीचे होगा। ऊपर के उदाहरण में आपने 19.09.2023 को निवेश किया तो उसी दिन आपका 0.5479 रुपये कट कर निवेश होगा। अगले दिन फिर कुछ कटेगा और ऐसा उस दिन तक कटेगा जिस दिन तक आप निवेश किए हुए हैं। अब देखिए ऊपर में मान लीजिए आपका पैसा बढ़ गया 20.10.2023 को तो आपका 0.5589 लगा और कुछ दिन बाद घट गया तो 0.5205 रुपया लगा।

देखिए अब आप ये भी सोच सकते हैं की एक बार में ही साल के अंत में ही Expense Ratio क्यू नहीं वसूल लेते हैं। ऐसा इसलिए नहीं होता हैं क्यूंकी ऐसा भी हो सकता हैं की आप 2 महीने में भी बेच कर निकाल जाए।

इसके अलावा सालाना रिटर्न में Expense Ratio निकालना सही नहीं हैं क्यूंकी NAV हर दिन बदलता हैं और उसी तरह आपकी निवेश की राशि भी। अगर आपका प्रॉफ़िट कम हो गया तो कम फीस और अगर ज्यादा हुआ तो ज्यादा फीस। अब ये हर दिन का हिसाब करना थोड़ा मुश्किल है पर आप समझ जाएँ की मोटा मोटी बात यही हैं।

Expense Ratio पर किन किन चीजों का असर होता हैं

आमतौर पर Expense Ratio Mutual Fund कंपनी कितना बड़ा है उसपर निर्भर हैं। इसके अलावा वो AMC कौन सा Fund मैनेज कर रहे हैं। अगर Equity होगा तो ज्यादा Expense Ratio होगा, Index Mutual Fund होगा तो कम Expense Ratio होगा। ऐसा इसलिए क्यूंकी Actively Managed Funds, मतलब की ऐसे funds जिनमे टीम काम करती हैं वो अपना फीस लेते हैं। और Passively Managed Funds में कोई टीम नहीं होती हैं इसलिए उनकी Expense Ratio भी कम होती हैं।

SEBI ने हाल ही में AUM के हिसाब से भी Expense Ratio कितना होना चाहिए इस पर नियम बनाया है।

Assets Under Management (AUM) करोड़ मेंEquity Mutual Funds के लिए Total Expense Ratio (TER) का लिमिट
0-5002.25%
501-7502.00%
751-20001.75%
2001-50001.6%
5001- 10,0001.5%
10,001- 50,000हर 5000 करोड़ पर 0.05% expense ratio कम होता जाएगा

कम Expense Ratio अच्छा क्यू होता हैं

कम Expense Ratio होने से आपके अपने निवेश किए हुए पैसे पर ज्यादा रिटर्न मिलता हैं। उदाहरण के लिए हम Nippon India Large Cap Fund – Direct Plan Expense Ratio 0.9% और इसी का Regular Plan Expense Ratio 1.72% ले लेते हैं। (आप खुद भी Money Control पर देख सकते हैं)

Nippon India Large Cap Fund – Direct PlanNippon India Large Cap Fund Regular Plan 
Expense Ratio0.9%1.72%
AUM15855.03 Cr15855.03 Cr
NAV73.4681 रुपया66.9193 रुपया
CAGR (1 Year)25.34 %24.31 %
CAGR (10 साल)18.50 %17.46 %
50 हजार के lumpsum निवेश पर 1 साल में Return62749 रुपया62230 रुपया
50 हजार के lumpsum निवेश पर 10 साल में Return2,72,994 रुपया2,49,960 रुपया

आपको अगर Compounding का थोड़ा सा भी समझ होगा तो आप अंदाजा लगा सकते हैं की सिर्फ 1% का भी अंतर लंबे समय में लाखों में नुकसान करा सकता हैं। महज 50 हजार के निवेश में आपको 10 साल में 23 हजार का नुकसान हो गया वो भी सिर्फ 0.82% के Expense Ratio के कारण।

Direct Plan में कम Expense Ratio क्यू होता हैं

अगर आप ऊपर उदाहरण को देखेंगे तो आपको समझ आएगा की Direct Plan में Expense Ratio कम होता हैं। अब ऐसा इसलिए क्यूंकी Direct Plan में Professional Experts की टीम नहीं रहती हैं और आप सीधा AMC से Mutual Fund खरीदते हो। टीम नहीं रहती तो उनके खर्चे भी नहीं होते हैं बस इसलिए उनके Expense Ratio कम होते हैं।

Total Expense Ratio का महत्व

सबसे बड़ा जरूरत इसका ये हैं की आपको पता चलता हैं की कौन सा कंपनी के खर्चे ज्यादा हैं। देखिए किसी भी निवेशक के लिए सबसे जरूरी जो हैं वो की उनका ज्यादा से ज्यादा प्रॉफ़िट हो। अब अगर आपने ऊपर के टेबल को देखा होगा तो आप समझ पाएंगे की लंबे समय में 1% का Expense Ratio भी लाखों का नुकसान करा सकता हैं।

आप Expense Ratio का इस्तेमाल करके हर एक Mutual Fund का तुलना कर सकते हैं की कौन सा बेहतर हैं और उसके बाद अपना निर्णय ले सकते हैं। अगर आप Mutual Fund लेने से पहले Expense Ratio का तुलना करेंगे तो आप पाएंगे की Direct Plan में Expense Ratio Regular Plan वाले से हमेशा कम रहता हैं। तो आप अपने लिए वो देख कर चुना करिए।

अंत में

Expense Ratio किसी भी म्यूचूअल फंड को मापने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण जरिया हैं। ये AMC के खर्चों से जुड़ी कुछ बातें बताता हैं। हालांकि वो उतने जरूरी नहीं होते हैं। एक निवेशक के रूप में आपको चाहिए कम पैसे में ज्यादा फायदा हो।

इसलिए आप जब भी Mutual Fund खरीदे एक बार Expense Ratio जरूर देख ले। उम्मीद करते हैं आपको कुछ जानकारी मिली होगी। अगर फिर भी कुछ समझ ना आए तो आप नीचे कमेन्ट करके पुछ सकते हैं।

One thought on “Mutual Fund में कम Expense Ratio मतलब ज्यादा प्रॉफ़िट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Index