P E Ratio क्या होता हैं (हिन्दी में)

PE ratio

समुन्द्र जितना बड़े स्टॉक मार्केट में बहुत से ऐसे financial ratio है जिसे समझना बहुत जरूरी हैं। एक ऐसा ही ratio हैं PE Ratio जिसे Price-to-Earning Ratio कहते हैं। जब भी बात Value Investing की आती हैं तो PE Ratio बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस लेख में PE Ratio के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई हैं जैसे की PE Ratio क्या हैं और PE Ratio का कैसे विश्लेषण करें। आप इसे समझकर अपने निवेश को एक सही दिशा दे सकते हैं।

PE Ratio क्या होता हैं? PE Ratio कैसे Calculate होता हैं?

PE ratio मतलब Price to Earning Ratio एक financial मीट्रिक है जिसे निवेशक कंपनी का मूल्यांकन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। PE Ratio को calculate करने का फार्मूला हैं: P/E Ratio फार्मूला = (Current Market Price of a Share / Earnings per Share)।

किसी कंपनी का PE ratio निकालने के लिए उस कंपनी का शेयर की कीमत को उस कंपनी के earnings per शेयर से भाग करके निकाल सकते हैं। इसे निकालने के लिए आपको निम्नलिखित दो चीजे चाहिए:

  • Current Market Price of a Share (शेयर की कीमत)
  • Earnings per Share- EPS (एक शेयर पे कितनी कमाई कंपनी ने की हैं)

Earnings आमतौर पर पिछले 4 quarter का लिया जाता हैं EPS (Earnings per Share) का हिसाब करने के लिए। उदाहरण से समझते हैं- मान लीजिए किसी कंपनी का PE ratio 20 है। अब इसका मतलब ये है की एक निवेशक एक रुपया कमाने के लिए उस शेयर में 20 रुपया निवेश करने के लिए तैयार हैं। एक और उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए किसी कंपनी का pe ratio 15 हैं। अब ऐसे में तो आप 15 रुपये में ही 1 रुपये कमा लेंगे तो फिर 20 रुपये क्यू निवेश करना हैं। इस का जवाब आपको मिल जाएगा की क्यू ऐसा करना सही नहीं हैं।

उससे पहले 20 के PE ratio पर वापस आते हैं। जब आप pe ratio निकाल लेते हैं तो सवाल ये आता है की ये PE ratio कम है या ज्यादा हैं। अगर कम है तो कितना कम है और ज्यादा है तो कितना ज्यादा हैं। इसके लिए आपको PE Ratio का तुलना करना पड़ेगा और analyze करना पड़ेगा।

PE Ratio कितने तरह का होता हैं?

PE Ratio दो तरह के होते हैं। अब हमे मालूम नहीं है की हिन्दी में इन दोनों को क्या बोले पर आप समझ लीजिए अपने हिसाब से:

  • Forward P/E Ratio
  • Trailing P/E Ratio

देखिए P/E ratio formula में जो EPS है उसी का खेल है सारा। EPS का मतलब है Earning per share। अब ऐसा होता है की एक तो हमारे पास पुराना earning का हिसाब किताब रहता हैं। पर भविष्य में होने वाले earning का बस अनुमान लगाया जा सकता हैं। और यही पर ये दो earning आपको दो P/E ratio दे देता हैं।

Forward P/E ratio का मतलब भविष्य में होने वाले earning का अनुमान लगाकर जो EPS और शेयर की कीमत से जो PE ratio निकले वो Forward P/E ratio। और पुराने 12 mahine (TTM – Trailing Twelve Month) का earning से जो PE ratio निकले वो Trailing P/E Ratio.

PE Ratio का मतलब कैसे समझे?

PE Ratio का मतलब समझने के लिए एक उदाहरण ले लेते हैं जिससे आपको समझने में आसानी होगा।

कंपनी Aकंपनी Bकंपनी CIndustry/Sector/Indices
EPS101220
शेयर की कीमत 200180280
PE Ratio20151417

3 कंपनी हैं A, B और C, तीनों का PE ratio हैं और उस सेक्टर (ऑटो, FMCG, pharma इत्यादि ) का PE ratio ऊपर दिया हुआ हैं। ये तीनों कंपनी एक ही सेक्टर के हैं, PE हमेशा एक सेक्टर या फिर पिछले PE ratio से तुलना की जाती हैं।

कंपनी B का PE ratio 15 है जिससे आपको ये पता चलता हैं की कंपनी B का शेयर की कीमत कम है जो की 180 है। मतलब की आप ये समझ गए की अगर PE Ratio कम है तो शेयर का कीमत होगा है जो की आप कंपनी A और C से तुलना करके देख सकते हैं। कंपनी A का शेयर की कीमत 200 रुपया हैं और कंपनी B का 180 और कंपनी C का 280। यह पर एक निष्कर्ष निकाल जा सकता है की अगर PE कम है तो शेयर का कीमत भी कम होगा और अगर PE ज्यादा है तो तो शेयर का कीमत भी ज्यादा होगा, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता हैं।

कंपनी C का PE ratio 14 है तो इससे तो ये होना चाहिए की शेयर की कीमत कम होनी चाहिए पर ऐसा नहीं हैं। कंपनी C के शेयर की कीमत 280 रुपये है जो की तीनों में सबसे ज्यादा हैं। अब ये कैसे हो गया हैं। यही पर लोग धोका खा जाते हैं। इसलिए सिर्फ PE पर निवेश नहीं करना चाहिए। कंपनी C को अगर आप देखे तो इसका EPS इन तीनों में ज्यादा हैं। मतलब की कंपनी अच्छा काम कर रही है और पैसे बना पा रही हैं। देखिए अब हर कंपनी अलग अलग तरीके से काम करती हैं, इन तीनों में कंपनी C ने अपने प्रॉफ़िट को बढ़ाया हैं जिसके कारण उसका EPS 20 हैं और PE ratio में EPS का बहुत महत्व हैं।

कंपनी A को अगर देखे तो इससे ये समझ में आता हैं की कंपनी उतना अच्छा काम नहीं कर रही हैं। जिसके कारण उसका शेयर का कीमत भी ज्यादा हैं कंपनी B से और PE तो सबसे ज्यादा हैं।

अगर आप तीनों कंपनी और उस सेक्टर के PE ratio को अच्छे से analyze करे तो आप समझ पाएंगे की:

  • कंपनी A एक overvalued कंपनी हैं जो की उतना प्रॉफ़िट नहीं कमा पा रही हैं।
  • कंपनी B और C दोनों ही undervalued स्टॉक्स हैं क्यूंकी उन दोनों की PE Ratio सेक्टर के PE ratio से कम हैं।
  • कंपनी B और कंपनी C दोनों में से कंपनी C का शेयर की कीमत ज्यादा महंगी हैं लेकिन फिर भी कंपनी C में निवेश करना सही हैं। अब ऐसे इसलिए क्यूंकी कंपनी बहुत तेजी से grow कर रही हैं और उतनी तेजी से उसकी शेयर प्राइस नहीं grow की है।
  • PE को देख कर ये कहना की शेयर सस्ती है या महंगी है हमेशा सही नहीं होता हैं।

अब ये सारे EPS के कारण हुआ, पर PE ratio में शेयर की कीमत भी तो हैं। अगर शेयर की कीमत में अचानक से ऊपर नीचे हुआ (कोई बाहरी कारण जैसे की कोई अच्छी या बुरी खबर के कारण) तो PE ratio में बहुत अंतर आ जाता हैं। इसलिए आप हमेशा ही PE ratio average में देखे, मतलब की 6 महीने का PE ratio या 1 साल का PE ratio.

कम PE Ratio होने का कारण

वैसे तो PE ratio कम होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। नीचे कुछ मुख्य कारण दिए हुए हैं जिस से आप अंदाज लगा सकते हैं:

  • वो शेयर एक undervalued स्टॉक हो
  • growth नहीं हो रही हो या फिर कंपनी डूब रही हो
  • ऐसे भी हो सकता है की भविष्य में कंपनी की कोई scope न हो। (उदाहरण के लिए आज के डेट में landline फोन बनाने वाले कंपनी का क्या future)

ज्यादा PE Ratio होने का कारण

  • वो शेयर एक Overvalued स्टॉक हो
  • कंपनी ने अच्छे प्रॉफ़िट कमाए हैं और कंपनी खूब नोट छाप रही हैं।
  • भविष्य में कंपनी का बहुत अच्छा scope हैं। (Electric गाड़िया जैसे )

अब आप इन कारणों को अच्छे से रिसर्च करे और उस हिसाब से अपना पैसा निवेश करे।

PE Ratio को सही से कैसे इस्तेमाल करे

Pe ratio का सही इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी कंपनी के PE ratio को हमेशा उस कंपनी के पुराने PE ratio से तुलना करना हैं। इसके अलावा आप उस कंपनी के PE Ratio को उस कंपनी के sector के PE ratio से तुलना करना हैं। वो शेयर undervalued है या overvalued ये पता करने के लिए उस कंपनी के प्रतिद्वंद्वी से तुलना करना हैं।

अगर PE ratio में बहुत ज्यादा अंतर आता है तो आपको ये पता करना चाहिए की ये इतना अंतर आने का कारण क्या हैं? अगर कही से कुछ Fundamental Analysis करके आप पता लगा लेते हैं की स्टॉक Overvalued है या undervalued तो आप पैसे बना पाएंगे।

एक और चीज है की अगर growth दिख रहा है कंपनी में तो PE पर दिखेगा, तो आपको ये देखना है की ग्रोथ 4 दिन वाला growth है या फिर एक stable growth हैं।

PE Ratio का तुलना करने का एक और अच्छा तरीका है PE Median देखना। आप इसे भी इस्तेमाल करके बहुत कुछ समझ सकते हैं। केवल PE ratio पर निवेश करना बेवकूफी हैं। आप इसे अपने analysis के इस्तेमाल कर सकते हैं, पर सिर्फ PE के basis पर निवेश कर देना गलत हैं।

PE Ratio के फायदे

  • PE Ratio से आपको ये पता चलता हैं की कोई भी स्टॉक overvalued है या फिर undervalued हैं।
  • कंपनी अच्छा काम कर रही है ये भी पता चलता हैं। अगर किसी कंपनी का PE ratio ज्यादा है तो आप थोड़ा तो अंदाज लगा ही सकते है की कंपनी में growth हैं।
  • कम PE होने से ये भी पता चलता है की growth कम है और पैसा लगाना risky हैं। हालांकि ये हमेशा सही नहीं होता हैं पर आप अंदाज लगा सकते हैं।
  • PE ratio से आप तुलना कर सकते हैं एक कंपनी का दूसरे कंपनी से। इससे ये पता चलता है की किस कंपनी में पैसे लगाना सही हैं।

NIFTY PE Ratio कैसे चेक करे?

Nifty P/E Ratio आप https://www.niftyindices.com/reports/historical-data पर जाकर चेक कर सकते हैं। ये तो direct लिंक हैं पर आप गूगल में niftyindices सर्च करके reports में historical data में Nifty 50, Nifty 100, इत्यादि की P/E ratio और P/B ratio देख सकते है। आप नीचे वेबसाईट की फोटो देख कर भी समझ सकते हैं।

Nifty PE ratio today

ऐसा इसलिए है क्यूंकी आप सारे शेयर की PE ratio moneycontrol जैसे websites पर देख सकते हैं पर indices के P/E Ratio आपको थोड़ा मुश्किल होता हैं देखना हैं। वैसे जैसे undervalued और overvalued वाला concept स्टॉक में लगता है वैसे ही indices में भी लगता है। बस आपको पुराने P/E Ratio से तुलना करना हैं।

अंत में

सारी चीजों को एक बार अच्छे से समझ लेते हैं। कम PE का मतलब है सस्ती शेयर पर ऐसा हमेशा सही नहीं होता हैं इसलिए तुरंत से उसे खरीदने का जरूरत नहीं हैं। ज्यादा PE मतलब महंगा शेयर पर आप इसे खरीद भी सकते है क्यूंकी कंपनी में ग्रोथ हो सकता हैं। PE Ratio अकेले कुछ काम का नहीं हैं आप उसे तुलना करे। अब ये तुलना आप उस कंपनी के पिछले PE से कर सकते हैं या फिर उस कंपनी के सेक्टर से कर सकते हैं या फिर उस कंपनी के प्रतिद्वंद्वी से कर सकते हैं।

शेयर मार्केट में पैसा कमाने के लिए आपका गणित सही होना चाहिए। मतलब की आपको numbers के साथ खेलने मे मजा आना चाहिए। अब ऐसा इसलिए हैं क्युकी हर एक चीज जो है वो नंबर ही हैं। अगर आप हिसाब किताब करके सही से analyze नहीं कर पा रहे है तो आपको सीखने की जरूरत हैं और उसके लिए पढ़ने की जरूरत हैं। उम्मीद करते हैं आपको कुछ समझ में आया होगा अगर फिर भी आपके मन में कोई सवाल है तो आप नीचे कमेन्ट करके पुछ सकते हैं।

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