Portfolio in Hindi – Portfolio क्या होता हैं?

portfolio meaning in Hindi

अपने पैसों को बढ़ाने के लिए निवेश एक बहुत ही अच्छा तरीका हैं। यहाँ पर निवेश का मतलब शेयर बाजार में निवेश करना नहीं हैं। यहाँ पर निवेश का मतलब हर एक तरह का निवेश से हैं। भारत में बहुत ही कम लोग हैं जो अच्छे से निवेश करते हैं। इसलिए बहुत जरूरी हैं की आप उन कम लोगों में ना आए और जितना हो सके पैसे बचाए।

निवेश की दुनिया में Portfolio शब्द बहुत ही अहम हैं। इस लेख में Portfolio Meaning in Hindi के बारे में बताया गया हैं। इसके साथ ही portfolio कैसे बनता हैं, portfolio कितने तरह के होते हैं, portfolio को बेहतर कैसे करे, Portfolio में Risk को कैसे मैनेज करें इत्यादि के बारे में बताया गया हैं। आप इन्हे समझकर अपने निवेश का सफर शुरू कर सकते हैं।

Portfolio क्या होता हैं?

Portfolio का मतलब निवेश सूची होता हैं। आपने जहां जहां पैसे निवेश किए हैं उन सभी को मिलकर आपका निवेश portfolio बनता हैं। अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश किए हैं तो आपके निवेश की सूची को Stock Market Portfolio कहेंगे। ठीक उसी तरह आपने अगर म्यूचूअल फंड में निवेश किया हैं तो उस सूची को म्यूचूअल फंड पोर्ट्फोलीओ बोलेंगे। इसी तरह आपके सारे निवेश की सूची को पोर्ट्फोलीओ बोला जाता हैं।

एक आसान उदाहरण से समझते हैं- आप और हम ऐसे बोल सकते हैं की भाई हमारे झोला में एक एक किलो आलू हैं, एक किलो प्याज हैं, एक किलो टमाटर हैं और ऐसे ही बाकी के सब्जी हैं। पर निवेश की दुनिया में ये ऐसे नहीं बोला जाता हैं। आप ये नहीं कह सकते हैं की मेरे झोले में लाख रुपये का म्यूचूअल फंड हैं, लाख रुपये का सोने का निवेश हैं, लाख रुपए का FD हैं और ऐसे ही कुछ और भी निवेश हैं। निवेश की दुनिया या Finance की दुनिया में इस झोले को ही Portfolio कहते हैं।

ध्यान देने वाली बात ये है की कंपनी का भी Portfolio होता हैं। इसके साथ ही अलग अलग जगहों पर इसका मतलब अलग होता हैं, पर निवेश की दुनिया में ये एक ऐसा संग्रह हैं जिसमे किसी व्यक्ति की सारी निवेश की सूची रहती हैं।

निवेश Portfolio का उदाहरण

मान लीजिए आपने निवेश करने शुरू किया हैं। अब आप अपना पैसा निम्नलिखित जगहों में लगा सकते हैं:

  • Fixed Deposits, Recurring Deposit
  • Post Office में निवेश
  • Mutual Funds (Equity, Debt, Hybrid)
  • Share Market (Equity, F&O, Commodities)
  • Gold (Digital, Physical, SGBs)
  • Real Estate
  • अन्य Government Bonds और Securities
  • NPS, PPF

अब इनके अलावा भी और विकल्प हो सकते हैं। पर फिलहाल के लिए मान लीजिए की आपने कुल 10 लाख रुपये इन सारे निवेश में लगा दिए हैं। अब आपने जो अपना निवेश portfolio बनाया उसमे ये सारे निवेश रहेंगे और उस portfolio की value 10 लाख रुपये हुए।

आपने ऐसा सुना भी होगा की फलाना आदमी का 1 करोड़ का Portfolio हैं। इसका मतलब यही हुआ की उस आदमी की निवेश की कुल राशि 1 करोड़ हैं। अब वो करोड़ कहा कहा निवेश किया गया हैं ये उस Portfolio को देखने से ही पता चलेगा।

निवेश Portfolio में Asset Allocation

Asset Allocation का मतलब होता हैं की आप अपने निवेश को किन किन जगह निवेश करेंगे। ऊपर के उदाहरण में आपने देखा की आप अपने निवेश को FD, RD, शेयर मार्केट, म्यूचूअल फंड इत्यादि जैसे जगहों मे लगा सकते हैं। इसको ही Asset Allocation कहते हैं। ये पूरी तरह से एक इंसान के ऊपर निर्भर करता हैं की वो अपना Asset किस किस जगह पर Allocate कर रहा हैं। इन सारे श्रेणी की निवेश के बारे में जानकारी नीचे दी गई हैं:

शेयर मार्केट

Stocks, शेयर या Equity में निवेश का मतलब हैं की आप किसी कंपनी के हिस्सेदारी में निवेश कर रहे हैं। जब आप किसी कंपनी की Ownership के लिए निवेश करते हैं तो उस कंपनी के प्रॉफ़िट का हिस्सा मिलता हैं। ठीक उसी तरह अगर कंपनी loss करता हैं तो आपको नुकसान उठाना पड़ता हैं। Stocks या शेयर में निवेश करने के लिए आपको Demat Account चाहिए होता हैं। आप किसी भी ब्रोकर के पास से ये खुलवा सकते हैं। उसका इस्तेमाल करके आप exchange से शेयर मार्केट में निवेश कर सकते हैं।

शेयर मार्केट में निवेश में बहुत risk हैं पर उसके फायदे भी हैं। बिना पूरी जानकारी के शेयर मार्केट में पैसा निवेश करना बेवकूफी हैं।

एक अच्छा शेयर खोजने के लिए आपको उस कंपनी का Fundamental Analysis करना होता हैं। इस से ये पता चलता हैं की कंपनी कैसा काम कर रही हैं और कितना प्रॉफ़िट कमा रही हैं। इसके अलावा आप technical analysis का उपयोग करके अपने प्रॉफ़िट को ज्यादा से ज्यादा बना सकते हैं।

Fixed Deposits और Bonds

Fixed Deposits में निवेश का मतलब हैं की आप बैंक को अपना पैसा देता हैं और बैंक उस पैसे पर ब्याज देता हैं। आप fixed deposit को 7 दिन से लेकर 10 साल तक के लिए खुलवा सकते हैं। FD के mature होने पर आपको वो पैसा वापस मिल जाता हैं।

Bonds debt securities जिसे सरकार और प्राइवेट कंपनी जारी करती हैं। जब आप bonds में निवेश करते हैं इसका मतलब हैं की आप उस संस्था को उधार में पैसा दे रहा हैं। सामने वाला पार्टी आपको अपने निवेश किए हुए राशि के mature होने पर आपको कुछ ब्याज देता हैं। शेयर मार्केट की तुलना में Bonds में risk बहुत कम हैं।

मार्केट में अलग अलग तरह के bonds उपस्थित हैं – Sovereign Gold Bonds (SGBs), Treasury Bills (T-Bills), इत्यादि इसके कुछ उदाहरण हैं। हर एक bond की अपने फायदे और नुकसान हैं।

ज्यादातर लोग bonds और FD को निवेश के रूप में ना देखकर अपने पैसे को सुरक्षित रखने का जरिया समझते हैं। आए दिन जो scams होते रहते हैं इसलिए लोग इनमे निवेश कर देते हैं जिससे उसका पैसा सुरक्षित  रहे।

Real Estate

जमीन जायदाद खरीदना तो सबलोग चाहते हैं। जैसा की जमीन का रेट हमेशा ही बढ़ता रहता हैं तो Real Estate में निवेश करना एक अच्छा विकल्प माना जाता हैं। इससे आपका portfolio में risk भी कम होता हैं और portfolio diversify भी हो जाता हैं।

देखिए Real Estate में निवेश करने का एक तो पुराना तरीका हैं की आप घर खरीद लीजिए या जमीन खरीद कर घर बना लीजिए। दोनों में ही आपको बहुत लागत लग जाएगा। एक और तरीका हैं निवेश करने का जो की हैं Real Estate Investment Trusts (REITs)।

अब ये क्या होते हैं कैसे काम करते हैं वो बहुत बड़ा विषय हैं। फिलहाल के लिए आप इसे शेयर मार्केट से खरीद सकते हैं। ये भी शेयर की तरह ही खरीदा जाता हैं। उदाहरण के लिए आप Godrej Properties को देख सकते हैं।

Mutual Funds और  Exchange-Traded Funds (ETFs)

Mutual funds और ETFs में बहुत सारे निवेशको का पैसा professional experts और analysts अपने हिसाब से शेयर मार्केट, debt, gold, Real estate इत्यादि जैसी चीजों में निवेश करते हैं। मार्केट में बहुत तरह के ETFs और म्यूचूअल फंड मौजूद हैं।

निवेशक अपनी सुविधा के हिसाब से Equity म्यूचूअल फंड, Debt म्यूचूअल फंड या hybrid म्यूचूअल फंड में निवेश कर सकते हैं। ETFs में भी निवेशक अपने हिसाब से index fund या commodity fund में निवेश कर सकते हैं।

दोनों की अपने अपने फायदे और नुकसान हैं और दोनों में ही अलग अलग रिटर्न कमाने के जरिए।

कुछ अन्य निवेश

  • Commodities: Commodities मतलब सोना, तेल और खेती वाले समान, इत्यादि जैसी चीजों में निवेश करना। हालांकि ज्यादातर लोग इसमे निवेश नहीं करते हैं पर ये भी एक अच्छा तरीका हैं अपने निवेश के risks को कम करने का।
  • Cryptocurrencies: Digital currencies जैसे की Bitcoin और Ethereum हाल फिलहाल में बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। हालांकि अभी इनका मार्केट उतना safe नहीं हैं। चूंकि इसने बीते कुछ समय में ही बहुत लोगों को अपने तरफ आकर्षित किया हैं इसलिए आप इस पर भी एक बार विचार कर सकते हैं।

निवेश Portfolio में Asset Allocation कैसे करें

किसी भी निवेश में Asset allocation बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कौन से Asset में कितना निवेश करना हैं ये बहुत सारी चीजों के ऊपर निर्भर करता हैं। एक जो सबसे आसान चीज है इसको पता करने का वो हैं आपके निवेश के लक्ष्य। नीचे कुछ कारक दिए गए हैं जिनके हिसाब से आपको अपने Asset Allocate करने में मदद मिलेगी।

Financial लक्ष्य

आपका Financial लक्ष्य आपके Asset Allocation में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नीचे कुछ लक्ष्य दिए गए हैं:

  1. Retirement: अपने Retirement के लिए पैसे बचाना। इसमे आपको ऐसे Assets चुनने चाहिए जिनमे रिस्क कम हो और Growth भी थोड़ा ठीक हो।
  2. शिक्षा: जिस तरह से महंगाई बढ़ रही हैं, आने वाले समय में शिक्षा के ऊपर बहुत पैसे लगने वाले हैं। तो अगर आप अपने बच्चों के भविष्य को लेकर थोड़े से जागरूक हैं तो आप ऐसे निवेश चुने जिसमे Return अच्छा हो। आप इसके लिए Mutual Fund में निवेश कर सकते हैं।
  3. अपने पैसों को सुरक्षित रखने: जैसा की आपको मालूम हैं की Inflation का कितना महत्व हैं। पर फिर भी कुछ निवेश ऐसे करने हैं जिसमे बिल्कुल ही रिस्क ना हो। अब ऐसा इसलिए क्यूंकी आपका मूल पैसा कही नहीं जाना चाहिए। आप इसके लिए Real Estate या FD में निवेश कर सकते हैं।
  4. कुल रिटर्न: किसी भी निवेश का मूल कारण होता हैं अपने पैसों को बढ़ाना। अगर आप अपने पैसे पर Inflation की दर से ज्यादा Return नहीं ले रहे हैं तो आपके पैसे को Inflation खा जाएगा।

Risk लेने की छमाता

जिस तरह हर एक उंगली बराबर नहीं होती हैं ठीक उसी तरह हर एक निवेश में risk एक जैसा नहीं होता हैं। अगर किसी निवेश में रिटर्न ज्यादा हैं तो जाहीर सी बात हैं उसमे रिस्क भी ज्यादा होगी। अपने Risk लेने की छमाता को पहचानकर आप अपने निवेश को सही रूप में निवेश कर पाएंगे। किसी भी इंसान की छमता निम्नलिखित चीजों पर निर्भर करती हैं:

  • निवेशक की उम्र: कम उम्र वाले निवेशकों के ऊपर जिम्मेदारी कम होती हैं इसलिए उनके रिस्क लेने की छमता ज्यादा होती हैं। ठीक उसी तरह ज्यादा उम्र वाले लोगों की छमता कम होती हैं।
  • निवेश का अनुभव: जैसे जैसे आप निवेश की दुनिया के बारे में जानेने लगेंगे वैसे वैसे आपको अपने ऊपर भरोसा होने लगेगा और इस ज्ञान को अपने निवेश में इस्तेमाल कर पाएंगे जिससे आपका Risk लेने की छमता बढ़ जाती हैं।
  • Financial परिस्थिति: आपके ऊपर की जिम्मेदारी आपकी परिस्थिति को काफी हद तक प्रभावित करता हैं। अब इसमे उम्र का कोई भी हाथ नहीं होता हैं। ऐसा हो सकता हैं की एक 25 साल के निवेशक के पास बिल्कुल भी पैसे ना बचते हो निवेश के लिए और वही एक 45 साल के निवेशक के ज्यादातर पैसे बच सकते हो।

ये बहुत जरूरी हैं की आप निवेश को अपने लक्ष्य और Risk के हिसाब से करें। दूसरे क्या कर रहे हैं और कैसे कर इन सब चीजों पर ध्यान ना दे।

अपने Risk को कैसे मैनेज करें

आपने Asset Allocation किस तरह से किया हैं ये ही आपके Risk को मैनेज करता हैं। पर इसके अलावा कुछ टिप्स नीचे दी गई हैं

  • Diversification: इसका मतलब ये होता हैं की अपने सारे पैसे एक जगह ही ना निवेश करे। उदाहरण के लिए अगर आप अपना पैसा शेयर मार्केट में निवेश कर रहे हैं तो आप किसी एक कंपनी या किसी एक सेक्टर में ना निवेश करें। अलग अलग कंपनी जो की अलग अलग सेक्टर के हो उसमे निवेश करें। ऐसा करने से आपका नुकसान होने की संभावना बहुत हद तक कम हो जाती हैं।
  • Portfolio को सुधारते रहें: इसका मतलब ये हुआ की आप अपने Portfolio को हमेशा ही सुधारते रहिए। इसके लिए आप अपने Portfolio को चेक करते रहिए और जो भी निवेश में आपको ज्यादा फायदा नहीं हो रहा हैं या फिर नुकसान हो रहा हैं उसमे सुधार करते रहिए।
  • Emergency Fund: Risk को मैनेज करने का ये एक बहुत ही अच्छा तरीका हैं। आप अपने लिए एक Emergency Fund बनाए जिसमे आप अपने महीने के 6 गुना खर्चे को अलग से रख दे। ये आपके किसी Emergency में काम आने वाले पैसे हैं। आप अपने हिसाब से इसे 8 या 12 महीने भी कर सकते हैं।
  • Insurance लीजिए: देखिए भविष्य किसी ने नहीं देखा हैं, कब क्या हो जाए कोई नहीं जनता हैं। इस लिए आपको अपने लिए एक जीवन बीमा और अपने परिवार के एक स्वास्थ्य बीमा लेना हैं। जो लोग कमाते हैं उनका ही जीवन बीमा लेना हैं क्यूंकी बाकियों का जीवन बीमा लेने का कोई मतलब नहीं बनता हैं। पर ये पूरी तरीके से आपके ऊपर हैं।

निवेश का समय सीमा

Asset Allocation में निवेश की सीमा भी बहुत मायने रखती हैं।

  • Short-Term लक्ष्य (1-3 years): अगर आपका कोई 2-3 साल का लक्ष्य हैं जैसे की कही घूमने जाना या फिर कोई काम करना तो आप वैसे परिस्थिति में अपने मूल को गवाना नहीं चाहेंगे। तो ऐसे में आप कम रिस्क वाले निवेश को चुन सकते हैं।
  • Intermediate-Term लक्ष्य (3-10 years): आप इसमे ऐसे निवेश को चुनिये जिसमे आपका पैसा भी सुरक्षति रहें और बढ़ते भी रहें।
  • Long-Term लक्ष्य (10+ years):

निवेश की रणनीति

एक निवेश की रणनीति इस चीज पर निर्भर करता हैं की वो निवेशक को कैसा रिटर्न चाहिए। कुछ प्रचलित रणनीतियाँ नीचे दी गए हैं:

  • Passive निवेश: इस निवेश में निवेशक Index Funds और ETFs में निवेश करता हैं। चूंकि ये passively मैनेज होते हैं इसलिए इसे Passive Funds भी कहते हैं।
  • Active निवेश: इसमे निवेशक किसी म्यूचूअल फंड या शेयर को हमेशा चेक करते हैं और मार्केट के उतार चढ़ाओ के ऊपर बहुत ही निर्भर करते हैं। चूंकि इसमे हमेशा आपको बाजार को Analyze करने की जरूरत होती हैं इसलिए Active निवेश कहते हैं।
  • Value Investing: Value Investing का मतलब होता हैं की आप किसी शेयर को कम दाम पर खरीद कर उसे अपने पास रखते हैं जब तक वो अच्छे रिटर्न ना दे। इसमे आप सिर्फ वो ही कंपनी चुनते हैं जिनकी Fundamentals और Technical अच्छे होते हैं। चूंकि आप किसी कंपनी के Value मतलब की उनके Financial record देख कर निवेश करते हैं इसलिए ऐसे निवेश को Value Investing कहते हैं।
  • Growth Investing: जैसे कोई छोटी कंपनी जिसकी भविष्य में बहुत जरूरत हैं। ऐसे कंपनी में पैसा लगाना Growth Investing कहा जाता हैं। उदाहरण के लिए अगर आप आज के तारिक में Renewable Energy बनाने वाले कंपनी में पैसा लगाते हैं तो उसे Growth Investing कहा जाएगा।
  • Income Investing: कुछ निवेश ऐसे होते हैं जिनमे आपको हमेशा कुछ ना कुछ इंकम होती हैं जैसे की Mutual Fund में SWP, या फिर शेयर मार्केट में Dividend देने वाले शेयर। ऐसे निवेश जिनमे कुछ ना कुछ आपको इंकम होते रहती हैं उसे इंकम investing कहते हैं।

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