Return On Equity क्या होता हैं? ROE Meaning in Hindi

Return On Equity Meaning in Hindi

शेयर मार्केट में जब आप किसी शेयर या स्टॉक का Fundamental Analysis करते हैं तो आपको कुछ ratios की जरूरत पड़ती हैं। आप इन ratios की मदद से किसी भी कंपनी के काम काज को analyze करते सकते हैं।

उसी Financial Ratios में से एक जरूरी ratio हैं Return on Equity (ROE)। इसके अलावा भी बहुत से ratio होते हैं जैसे की PE Ratio, PB Ratio, PEG, EPS इत्यादि जिनकी जरूरत आपको fundamental analysis के वक्त पड़ती है। इस लेख में ROE के बारे में बताया गया हैं, ROE क्या होता हैं, ये कहाँ इस्तेमाल होता हैं और शेयर बाजार में कैसे काम करता हैं।

Return on Equity (ROE) क्या होता हैं? ROE Meaning in Hindi 

ROE एक financial ratio हैं जो किसी कंपनी के अपने निवेशकों के पैसे पर profit कमाने की छमता को बताता हैं। आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं की ROE से ये पता चलता हैं की कोई कंपनी अपने shareholder के पैसे को कैसे इस्तेमाल कर रही हैं और कितना पैसा कमा रही हैं।

Return on Equity (ROE) को और भी आसान शब्दों में मतलब हैं की आपके निवेश किए हुए पैसे पर आपको कितना return (फायदा या नुकसान) मिलेगा।

ROE percentage में होता हैं जैसे की 10%, 15% या 20% और ये एक तय समय सीमा के लिए निकाला जाता हैं, जैसे की एक Financial Year इत्यादि।

ROE का फार्मूला हैं : ROE = PAT/ Total Equity

यहाँ पर

  • PAT (net income) का मतलब हैं सारे interests और taxes जमा करने के बाद जो कंपनी के हाथ लगा वो।
  • Total Equity का मतलब हैं सारे shareholders का पैसा। इसमे Common Share और Preferred Share दोनों हैं।

ROE कितने तरह के होते हैं

ROE मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं।

  • Return on Common Equity
  • Return on Total Equity

वैसे तो Return on Total Equity ज्यादा common हैं और इसे ही अक्सर Return on Equity समझते हैं।

Return on Equity का उदाहरण

ROE समझने से पहले हमे ये समझना पड़ेगा की कोई कंपनी काम कैसे करती हैं और Equity का मतलब क्या होता हैं। मान लीजिए आपकी कोई कंपनी हैं। अब आपको कोई भी कंपनी चलाने के लिए पैसे लगते हैं जिसे हम Capital कहते हैं। आपके पास जो कुल assets हैं वो आपके capital का हिस्सा हैं।

अब ऐसा भी हो सकता हैं की आप किसी बैंक से लोन ले। ये भी हो सकता हैं की आप बाजार से पैसा उठा ले। तो इन सब चीजों को मिलाकर आपके पास जो पैसा आ रहा हैं उसे ही capital कहते हैं। और ये पूरा capital में उधार को हटा दे तो आपको शेयर holder का पैसा मिलेगा जिसे हम Equity बोलते हैं।

Capital = Total Equity (कंपनी की net worth) + Debt (उधार )

वैसे तो capital का मतलब ये भी होता हैं की assets में से आप liabilities घटा दीजिए तो capital मिल जाएगा। पर यहाँ बात कंपनी को चलाने की हो रही हैं उसकी value निकालने की नहीं हो रही हैं।

और कंपनी चलाने के बात इसलिए हो रही हैं क्यूंकी हमे return on equity निकालना हैं। और जैसे की Equity का मतलब ये होता है की कंपनी में shareholders का कितना पैसा हैं। तो हमे ये पता चल गया की Total Equity कितनी हैं। अब किसी कंपनी के कुल Equity के अंदर तीन चीजे आती हैं

  1. Common Equity
  2. Preferred Equity
  3. Cash Reserves + Surplus

पर चीजों को आसानी से समझने के लिए हम Total Equity = Common Equity + Preferred Equity।

Cash Reserves और Surplus भी Common Equity का हिस्सा होते हैं।

Common Equity Common shareholder के पास रहती हैं जिस पर शेयर मार्केट में trading होती हैं। Preferred Equity preferred शेयर holder के पास होती हैं जिसपर trading नहीं होती हैं। एक काम की चीज जानने वाली ये हैं की Preferred shareholders को dividend देना पहले से तय किया हुआ रहता हैं। और ये common shareholder को dividend देने से पहले दिया जाता हैं।

इस सब चीजों को एक उदाहरण से समझते हैं।

Capital = Common Equity + Preferred Equity + Debt

Capital = Common Equity + Preferred Equity + Debt
कंपनी 1कंपनी 2
20 लाख = 7.5 लाख + 4.5 लाख + 8 लाख50 लाख = 10 लाख+ 10 लाख+30 लाख
EBIT (Earnings before interest & taxes, जिसे आप operating profit भी कह सकते हैं)3 लाख10 लाख
Interest (जो आपने बैंक से उधार लिया हैं उसका ब्याज @ 10%80 हजार (8 लाख का 10%)3 लाख (30 लाख का 10%)
Profit before Tax (PBT – tax देने से पहले का प्रॉफ़िट)2 लाख 20 हजार7 लाख
Tax @ 30%66000 हजार2 लाख 10 हजार
Profit after Tax (PAT – tax देने के बाद का प्रॉफ़िट)1 लाख 54 हजार4 लाख 90 हजार
Dividend @ 15%67500 (4.5 लाख का 15%)1.5 लाख (10 लाख का 15%)
PAT – Dividend865003 लाख 40 हजार
Common Share Capital7.5 लाख10 लाख
Preference Share Capital4.5 लाख10 लाख
Net worth (Total Equity)12 लाख20 लाख
ROE
(1 लाख 54 हजार ÷ 12 लाख) × 100(4 लाख 90 हजार ÷ 20 लाख ) × 100
12.83%24.50%
Return on Common Equity*(86500 ÷ 7.5 लाख ) x 100(3 लाख 40 हजार ÷ 10 लाख) x 100
11.54%34%

*ऊपर दिए गए उदाहरण में Return on Common Equity = (PAT – DIVIDEND)/ Common Equity

देखिए आपको ROE निकालने की जरूरत नहीं हैं। आपको ये सारी चीजे बनी बनाई मिल जाती हैं किसी भी वेबसाईट पर। ना ही आपको किसी कंपनी की balance sheet देखने की जरूरत हैं और ना ही उनकी profit loss statement। आप बस ROE देख लीजिए। जैसा की आप किसी कंपनी का ROE देखे और ओर वो 15% हैं तो इसका मतलब क्या हैं।

Return on Equity (ROE) का इस्तेमाल कैसे करें 

  • कंपनी के performance को analyze करना : ROE एक बहुत ही आसान ratio जो कंपनी की कुल कार्यशैली को दर्शता हैं। इससे ये पता चलता हैं की निवेशकों के पैसे से क्या कंपनी सच में पैसे कमा रही हैं की नहीं। एक ज्यादा ROE का मतलब हैं की कंपनी अच्छा काम कर रही हैं।
  • किसी और कंपनी के साथ तुलना करना: अक्सर जब निवेशक निवेश करने की सोचते हैं तो उन्हे समझ नहीं आता हैं की पैसे किसमे निवेश करे। आप इसकी मदद से ये निर्णय ले पाएंगे। अगर ज्यादा ROE है तो इसका मतलब की कंपनी भविष्य में ज्यादा रिटर्न देगी। आप एक सेक्टर की भी तुलना कर सकते हैं। ये बहुत जरूरी हैं की आप किसी भी कंपनी का ROE उसके प्रतिद्वंदी के साथ ही तुलना करे क्यूंकी एक IT कंपनी का ROE एक Automobile कंपनी के साथ तुलना करने से गलत निष्कर्ष निकाल सकता हैं।
  • कंपनी के growth को analyze करना:  आप ROE के मदद से किसी कंपनी के पुराने हिसाब किताब देख कर ये अंदाज लगा सकते हैं की कंपनी ने बीते समय कैसे काम किया हैं जिससे आपको भविष्य के profits के बारे में थोड़ा बहुत समझ आएगा।

शेयर मार्केट में Return on Equity (ROE) का मतलब 

किसी भी financial ratio को analyze करना सर दर्द का काम होता हैं। पर अगर आपको अपने पैसे के ऊपर अच्छा रिटर्न चाहिए तो ये सब करना ही होगा। खैर ROE को देख कर आप बहुत कुछ समझ सकते हैं। नीचे कुछ महत्वपूर्ण चीजे दी गई हैं:

  • ज्यादा ROE अक्सर अच्छा होता हैं। लगभग सारे कंपनी के लिए ज्यादा ROE अच्छा ही माना जाता हैं। इससे पता चलता हैं की कंपनी अच्छा प्रॉफ़िट कमा रही हैं और निवेशकों को फायदा होगा। पर बहुत ज्यादा भी हैं तो थोड़ा तो सतर्क हो जाए क्यूंकी कुछ कंपनी अपना debt बढ़ाकर भी ROE बढ़ा सकती हैं।
  • एक स्थिर ROE किसी भी कंपनी और निवेशकों के लिए अच्छी खबर हैं। इससे ये पता चलता हैं की कंपनी पिछले वर्षों में आगे ही बढ़ रही है। तो ऐसे माना जा सकता हैं की आने वाले समय में भी अच्छा ही करेगी।
  • कंपनी के management skills अच्छे हैं ये भी पता चलता हैं क्यूंकी जब पैसों का सही इस्तेमाल हो रहा हैं तो जाहीर सी बात हैं की कंपनी चलाने वाले लोग भी skilled हैं।
  • अगर किसी कंपनी का ROE कम हैं तो जाहीर सी बात हैं की पैसे बर्बाद हो रहे हैं और कंपनी को और अच्छे से काम करने की जरूरत हैं।
  • एक ज्यादा ROE का ये भी मतलब हो सकता हैं की कंपनी की total equity कम हो रही हैं। या फिर ये कह सकते हैं की कर्ज बढ़ रहा हैं।

कितना ROE अच्छा होता हैं?

अगर आप किसी कंपनी का ROE देख रहे हैं तो कम से कम उसका ROE 15% से ज्यादा होना चाहिए। ये बहुत जरूरी हैं की आप सिर्फ ROE देखकर निवेश ना करे। और भी बहुत से ratio है जिनके बिना किसी भी शेयर का Fundamental Analysis अधूरा हैं। इसलिए पूरी जांच के बाद ही पैसा निवेश करे।

Return on Equity की सीमाएँ

हर एक चीज की अपने फायदे और नुकसान होते हैं। वैसे तो ROE एक अच्छा ratio हैं पर कही कही ये मात खा जाता हैं।

  • अगर कोई कंपनी चाहे तो कर्ज लेकर ROE बढ़ा सकती हैं। अब ऐसा इसलिए क्यूंकी Debt लेने से कंपनी की Equity कम हो जाएगी और अगर Equity कम हुई तो ROE खुद से बढ़ जाएगा। इसलिए सिर्फ ROE देखकर कभी निवेश नहीं करना चाहिए।
  • ROE सिर्फ tangible assets को हिसाब करने के लिए लेता हैं। अब ऐसे में ROE गलत हो सकता हैं अगर सिर्फ tangible assets को लेंगे।

Rate of Return और Return on Equity

वैसे तो दोनों एक जैसे ही लगते हैं लेकिन दोनों में जमीन आसमान का अंतर हैं। जहा Rate of Return आपको ये बताता हैं की आपको अपने पैसे पर कितना पैसे मिला वही दूसरी तरफ Return on Equity ये बताता है की कोई कंपनी आपके पैसे को कैसे इस्तेमाल कर रही हैं और कितना प्रॉफ़िट कमा रही हैं।

Negative Return on Equity का क्या मतलब होता हैं

इसका मतलब ये हैं की या तो कंपनी profit कमा नहीं पा रही हैं या फिर कर्ज बहुत ज्यादा हैं कंपनी के ऊपर। वैसे अगर कोई ज्यादा कर्ज वाली कंपनी हैं तो वैसे भी उसका ROCE देखना चाहिए।

अंत में

Return on Equity (ROE) एक बहुत ही जरूरी metric हैं अगर आप किसी कंपनी का fundamental analysis करते हैं। इससे ये पता चलता हैं की क्या कंपनी अपने निवेशकों के पैसे को सही से इस्तेमाल कर रहा हैं की नहीं और अगर कर रहा हैं तो कितना रिटर्न मिलेगा। Investors, analysts, और financial professionals ROE को इस्तेमाल निवेश करने के लिए करते हैं।

हालांकि हर किसी के तरह ROE के भी सीमाएँ हैं जैसे की अगर कर्ज बढ़ गया तो ROE भी बढ़ सकता हैं। इसलिए बहुत जरूरी हैं की आप सभी चीजों को जाँचे परखे उसके बाद ही निवेश करे। उम्मीद करते हैं आपको जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर कुछ भी समझ ना आए तो आप नीचे कमेन्ट करके पुछ सकते हैं।

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