शेयर बाजार में टैक्स कैसे लगता है? शेयर मार्केट Tax Rules

Share market Tax Rules 2023

निवेश की दुनिया में एक बहुत ही प्रचलित कहावत हैं की “जब तक आपको taxes के बारे में जानकारी न हो तब तक आप पैसा मत निवेश करिए”। शेयर मार्केट में आप बहुत पैसे कमा सकते हैं पर उसी के साथ आपको बहुत सारे taxes सरकार को भी देनी होगी। देखिए चाहे आपका मन हो या न हो taxes तो लगते ही हैं। बस फर्क ये पड़ता हैं की अगर आपको tax के नियम के बारे में जानकारी होगा तो आप अपने रिटर्न को अच्छे से मैनेज कर पाएंगे।

इस आर्टिकल में शेयर मार्केट से हुए कमाई जो की प्रॉफ़िट हैं, उस पर कितना कितना tax लगता हैं उसके बारे में बताया गया हैं।

शेयर मार्केट Tax Rules 2023

शेयर मार्केट से मुख्य रूप से तीन तरह से कमाई की जा सकती हैं। आप इसे ये भी कह सकते हैं की शेयर मार्केट में तीन तरह से पैसे बनते हैं।

  • Equity Delivery
  • Future and Options
  • Intraday

शेयर मार्केट में दो तरह के लोग भी होते हैं -एक trader और दूसरा निवेशक (investor)। जो इंसान Equity Delivery में पैसे लगता हैं उसे investor कहते हैं और जो बाकी के दोनों में लगता हैं उसे trader कहते हैं।

अगर आप एक trader है तो आपके अपने net profit को अपने taxable income में जोड़ देना हैं। उसके बाद आपको अपने Tax Slab के हिसाब से tax भरना पड़ेगा। वैसे F&O और Intraday के taxation में और भी नियम हैं, पर अभी इस आर्टिकल में Equity Delivery पर कितने taxes लगते हैं उसके बारे में बताया गया हैं।

Equity Delivery पर दो तरह से tax लगते हैं। ये इस बात पर निर्भर करता हैं की आपने किसी शेयर को कितने समय के लिए अपने पास रखा हैं।

  • Short-Term Capital Gains Tax (STCG)
  • Long-Term Capital Gains Tax (LTCG)

Short-Term Capital Gains Tax (STCG)

Short Term का मतलब है की अगर आप किसी शेयर को 1 दिन से ज्यादा और 1 साल से कम के लिए अपने पास रखे हैं। ऐसे शेयर होल्डिंग को Short Term holding कहते हैं और इन शेयर से हुए प्रॉफ़िट को Short Term Capital Gain कहते हैं।

STCG पर आपको 15% का टैक्स देना पड़ता हैं अगर कोई प्रॉफ़िट हुए हैं तो (Cess जोड़कर 15.6%)। उसके अलावा अगर आपका कुछ loss हुए हैं तो आप उसे अगले आने वालों सालों के profit में से घटा कर भी tax दे सकते हैं। इस process को हम loss set off करना कहते हैं। आप अपने losses को अगले 8 सालों तक carry कर सकते हैं और उसे set off कर सकते हैं। दोनों ही चीजों को एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने 01.01.2023 को 2 लाख रुपये के Tata Motors के शेयर खरीदे और उसे 07.09.2023 को 2 लाख 20 हजार में  बेच दिए। इसमें आपको 20 हजार का फायदा हुआ। क्यूंकी आपने शेयर को एक साल से कम समय के लिए अपने पास रखा था तो ये STGC होगा और इस पर आपको 20 हजार का 15% मतलब की 3000 रुपये टैक्स देना होगा। तो आपका net profit होगा 17 हजार का (Cess हटाकर)।

इसी उदाहरण में अगर आपने उन शेयर को 1.5 लाख में बेचा तो आपका loss हुआ। अब आप इस 50 हजार के loss को अगले साल carry कर सकते है। अब मान लीजिए आपने फिर अगले साल कोई trade किया और उसमे आपका 70 हजार का प्रॉफ़िट हुआ। तो आपका जो tax लगेगा वो 70 हजार – 50 हजार = 20 हजार पर ही लगेगा। आप cess का हिसाब अपने से कर सकते हैं।

एक गौर करने वाली बात ये हैं की STCL (Short term capital loss) को आप long term capital gains और short term capital gains दोनों से setoff कर सकते हैं।

Long-Term Capital Gains Tax (LTCG)

Long-Term Capital Gains Tax (LTCG) तब बोला जाता हैं जब आप किसी शेयर को एक साल से ज्यादा के लिए अपने पास रखते हैं। अब LTGC में क्या होता हैं की अगर आपका net profit एक लाख तक हैं तो आपको कोई tax देने की जरूरत नहीं हैं। पर अगर आपका net profit एक लाख से ज्यादा हैं तो आपको बाकी के पैसे पर 10% का tax देना पड़ेगा (Cess जोड़कर 10.4%)। इसको भी एक उदाहरण से समझते हैं:

मान लीजिए आपने कोई शेयर 2017 में खरीदा था जिसकी कीमत 5 लाख रुपये थी। अब अगर आप उसे 7 लाख में आज बेच दोगे तो वो LTGC होगा। इसमे आपको 2 लाख का प्रॉफ़िट हुआ। अब इस 2 लाख में से पहला 1 लाख पर तो tax नहीं लगेगा, पर बाकी के 1 लाख में 10% tax लगेगा जो की 10 हजार होगा। आप cess का हिसाब अपने से कर सकते हैं।

STCL की ही तरह आप Long Term में हुए loss को set off कर सकते हैं। पर आप LTCL (Long term capital loss) को सिर्फ long term capital gain से ही set off कर पाएंगे।

LTCL हो या STCL दोनों को set off करने के लिए आपको IT Return फाइल करना जरूरी हैं। 

अंत में

शेयर मार्केट से तो बहुत से लोग लाखों रुपये कमाते हैं। अब जो लोग बहुत दिन से शेयर मार्केट में लगे हुए हैं उन्हे तो टैक्स के बारे में सब कुछ मालूम होता हैं। दिक्कत नए लोगों को होता हैं। अगर आप नया नया शेयर मार्केट में निवेश करना शुरू कर रहे हैं तो जाहीर सी बात हैं आपको ये सब मालूम नहीं होगा। आपको अपने शेयर की खरीदने की कीमत से बेचने की कीमत में कितना अंतर चाहिए ये आपको मालूम होना बहुत जरूरी हैं। अब ऐसा इसलिए क्यूंकी पहले तो कुछ पैसे ब्रोकर ले जाएगा, फिर उस ब्रोकर का AMC भी तो आपको देना हैं, फिर आपको tax भी देना है।

अगर आप छोटे निवेशक हैं तो आपको इन सब चीजों के बारे में थोड़ा पता होना चाहिए। ऐसा नहीं हैं की ये सब बहुत ज्यादा राशि हैं पर शुरू शुरू में  जितना आपको अपने पोर्ट्फोलीओ में दिख रहा हैं उतना आपके बैंक अकाउंट में न जाए तो थोड़ा frustration होता हैं और कुछ नहीं। इसलिए बहुत जरूरी हैं की आप अपने निवेश को सही दिशा में लेकर जाए और उसके लिए जरूरी हैं की आप जागरूक रहे हैं।

उम्मीद करते है की आपको कुछ जानकारी मिली होगी, अगर आपको कुछ समझ नहीं आया हैं तो आप नीचे कमेन्ट करके पुछ सकते हैं।

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