शेयर मार्केट में निवेश के Risks को कैसे कम करें

Share Market Risks Management

अगर आप शेयर मार्केट में निवेश कर रहे हैं तो आपको शेयर मार्केट से जुड़े risk भी मालूम होंगे। शेयर मार्केट में निवेश risky तो हैं पर साथ ही उसमे ज्यादा रिटर्न भी हैं। अब अमीर तो सबको बनना हैं और जैसा कि मार्केट में उतार चढ़ाओ होते रहता हैं इसलिए बहुत जरूरी हैं की आप अपने निवेश को कम से कम रिस्की बनाए।

अब ऐसा इसलिए हैं की आपका मूल पैसा दुबे नहीं। अगर आप सही से निवेश करेंगे और अपने निवेश के risk को मैनेज करेंगे तो आपको ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिलेंगे। एक चीज ध्यान में रखिए की शेयर मार्केट में risk खत्म नहीं होता हैं बस कम हो जाता हैं वो भी अगर आप सही से निवेश किए तो। इस आर्टिकल में कुछ तरीके बताए गए हैं जिससे आप अपने शेयर मार्केट निवेश के Risks को कम कर पायेंगे।

कोई भी निवेश को long term निवेश सोच कर करिए

देखिए अगर आप एक छोटे समय के लिए निवेश कर रहे हैं तो आपको और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत हैं। यहां पर छोटे समय का मतलब 3 साल से कम हैं। अब ऐसा इसलिए हैं क्योंकि शेयर मार्केट में ज्यादातर कंपनी छोटे समय में उतना रिटर्न नहीं देती हैं जितना ज्यादा समय के निवेश में देती हैं।

ये इसलिए क्योंकि मार्केट में उतार चढ़ाओ लगा रहता हैं और ऐसा हो सकता है की कोई शेयर बहुत समय तक ही एक ही कीमत के आस पास घूमती रहे। और वैसे भी आप जितने देर तक मार्केट में रहेंगे उतना compounding का फायदा आपको मिलेगा। एक बहुत अच्छा कहावत हैं की शेयर मार्केट में निवेश का सही समय खोजने से बेहतर हैं की आप शेयर मार्केट में ज्यादा समय के लिए रह जाए।

अब ऐसा नहीं हैं की ये बनी बनाई बातें हैं आप कोई ठीक ठाक कंपनी उठा कर देख लीजिए, ज्यादा समय में वो ज्यादा ही रिटर्न दिए हैं। अब अगर आप निवेशक हैं तो आपके लिए ये रणनीती काम करेगी पर अगर आप Trader हैं तो ये आपके काम नहीं आएगा।

अपने निवेश को Diversify करिए

इसका मतलब ये हैं की आप अपने निवेश को अलग अलग जगह में करिए। कुछ पैसे fixed deposit करिए, कुछ mutual fund करिए, कुछ सोने में लगा दीजिए, कुछ debt में लगा दीजिए, कुछ real estate में लगा दीजिए या फिर कुछ ETF में लगा दीजिए। ऐसे ही निवेश के बहुत विकल्प हैं।

अब जरूरी तो नहीं हैं की आप अपना सारा पैसा शेयर मार्केट में ही लगाए। अगर शेयर मार्केट में भी लगा रहे हैं तो अलग अलग सेक्टर में लगा दीजिए, अलग अलग कंपनी में लगा दीजिए। उदाहरण के लिए आप Large Cap में कुछ निवेश करिए कुछ midcap में और कुछ Smallcap में।

इससे क्या होगा की अगर शेयर बाजार गिरता हैं तो कुछ स्टॉक्स ऐसे होते हैं जो ज्यादा नहीं गिरते हैं।ऐसे शेयर को Defensive शेयर कहते हैं। अब ऐसा क्यों होता हैं वो अलग विषय हैं। बस आप इतना समझिए की आपको अपना रिस्क कम करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को जितना diversify कर सकते है करिए।

अपने पोर्टफोलियो में Liquidity रखिए

liquidity का आसान शब्दों में मतलब है की आप अपने निवेश को आसानी से प्रॉफिट में बेच पा रहे है की नही। Liquidity अपने आप में बहुत बड़ा विषय हैं पर यहां पर एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपको कुछ पैसों की अचानक से जरूरत पड़ गई (बीमारी, accident इत्यादि जैसी चीजें)।

अब अगर आपके पास ऐसे निवेश नहीं हैं जिसमे आपको नुकसान ना हो तो आपको अपने निवेश का नुकसान उठाना पड़ेगा जो की एक गलत निवेश हो गया। क्योंकि कोई निवेश प्रॉफिट के लिए करता हैं नुकसान के लिए। समझिए की आपने शेयर मार्केट में कुछ पैसे लगाए और आपको पैसे की जरूरत पड़ गई और इस समय शेयर मार्केट नीचे गिरा हुआ हैं।

अब आपको चूंकि पैसों की जरूरत हैं तो आप तो शेयर बेच देंगे जिससे आपको नुकसान हुआ। अगर आप वही कुछ और भी निवेश किए रहते जैसे Fixed Deposit तो आपका मूल पैसा तो नही जाता। अब ये Liquidity भी हर के इंसान के लिए अलग अलग हो सकती हैं। किसी की जरूरत कम हो सकती हैं किसी की ज्यादा।

एक अच्छा तरीका हैं इस सब झमेला से बचने का की आप अपना इमरजेंसी फंड बना लीजिए। Emergency Fund का मतलब हैं की ऐसे पैसे जो आपके बुरे वक्त पर उपयोग में आ सके। आम तौर पर ये आपकी महीने के खर्चे का 6 गुना होता हैं पर आप अपनी मर्जी के हिसाब से इसे 9 या 12 महीने का कर सकते हैं। आप इन पैसों को बैंक में रख सकते हैं या फिर किसी ऐसे निवेश में जो बिना हानि के आप तुरंत इस्तेमाल कर पाए।

अपनी Risk लेने की छमता को पहचानना

इसका मतलब ये हैं की आपको ये पता होना चाहिए की आप कितना पैसा गवा सकते हैं और फिर भी आपका मानसिक सतुलन बिगड़े ना। इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं को अगर आपने कोई बुरी शेयर खरीद ले और फिर आपको नुकसान हो रहा हैं तो आपका क्या व्यवहार रहता हैं।

अब हर एक निवेशक के लिए Risk अलग अलग हो सकता हैं, एक 25 साल का निवेशक ज्यादा रिस्क ले सकता हैं एक 45 साल के निवेशक की तुलना में। अब ऐसा इसलिए क्योंकि आम तौर पर जैसे जैसे उमर बढ़ता हैं तो आपके ऊपर जिम्मेदारी आ जाती हैं और आप वैसे समय में पैसा गवा नही सकते हैं।

हालांकि ये एक आम उदाहरण हैं हो सकता हैं आपके उपर बहुत जिम्मेदारी ना हो और ऐसा भी हो सकता हैं आपके उपर बहुत जिम्मेदारी हो। इसलिए आपको अपने रिस्क लेने की छमता को पहचानना हैं ताकि आप अपने रिस्क के हिसाब से निवेश कर पाए।

आप अपने निवेश के लिए Rule of 100 का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। मतलब की अगर आपकी उम्र 25 हैं तो आप अपना निवेश का 25% पैसा बिल्कुल ही safe रखिए, बाकी पर आप अपने छमता के हिसाब से रिस्क ले सकते हैं। आपने इसलिए सुना होगा की experts और professionals ऐसा बोलते हैं की जितनी जल्दी हो सके निवेश शुरू कर दीजिए अगर ज्यादा returns चाहिए तो।

Fundamental और Technical Analysis करिए

इसका मतलब हैं की आप जिस भी शेयर या कंपनी में निवेश कर रहे हैं उसका पूरा हिसाब किताब करिए। कंपनी का PE Ratio, PB Ratio, PEG Ratio, ROCE, ROE, EPS कैसा हैं। कंपनी प्रॉफ़िट में हैं की नहीं हैं। कंपनी का कर्ज कितना हैं। कोई सरकारी नियम कंपनी के विकाश को धीरा कर सकती हैं क्या।

कंपनी के अंदर कोई समस्या तो नहीं हैं। इन सब चीजों का अध्ययन कीजिए। आसान सा चीज हैं – आप बस कंपनी में पैसे निवेश ना करने के कारण खोजिए अगर एक भी मिल जाता हैं तो अपने पैसा बचा लीजिए। आपको ये भी देखना हैं की कही शेयर की कीमत ज्यादा तो नहीं।

इस पूरी प्रक्रिया में आपको आसानी से पता चल जाएगा की कंपनी कैसी है और आपको पैसा लगाना चाहिए की नहीं।

भावनाओं में बहकर निवेश नही करना चाहिए

ये अक्सर वो लोग करते हैं जो किसी कंपनी के प्रति स्नेह रखते हैं। देखिए आप शेयर मार्केट में पैसा कमाने आए हैं और भावनाओं में बहकर आप पैसा नहीं कमा पाएंगे। हो सकता हैं आपको कोई कंपनी अच्छा लगता हो पर कंपनी आपके अच्छे लगने से रिटर्न नहीं देगी।

इसलिए बहुत जरूरी हैं की आप उस कंपनी का अच्छे से research कीजिए। कंपनी के Financial Records को देखिए की कंपनी कैसा perform कर रही हैं। इसके अलावा आप fundamental और technical analysis कर सकते हैं। आप उसके बाद ही निवेश करिए।

इसका विपरीत भी हैं की घबरा कर शेयर मत बेचिए। मार्केट में उतार चढ़ाओ लगा रहता हैं। हो सकता हैं कोई शेयर 10-15% नीचे चला जाए ऐसे समय में आपको घबरा कर शेयर नहीं बेचना हैं। आपको कीमत गिरने का कारण पता करना हैं। और अगर आपको लगता हैं की शेयर की कीमत अब बिल्कुल भी ऊपर नहीं जाएगी तो ही आप उस निवेश से बाहर निकाले।

हमेशा अपने निवेश को track करते रहिए

एक बहुत ही बड़ा समस्या लोगों को होती हैं की उन्हे मालूम ही नहीं होता हैं की अपने शेयर को कब बेचे या अपने प्रॉफ़िट कब निकाले। देखिए अगर आप सालाना के 15-18% रिटर्न बना पा रहे हैं तो आप उसको निकाल सकते हैं। स्टॉक मार्केट में 1 साल में इससे ज्यादा रिटर्न अगर आप कर पा रहे हैं तो बहुत अच्छी बात हैं। इसके अलावा आप निवेश करने से पहले ही अपना लक्ष्य निर्धारित कर लीजिए इससे आपको ये पता चलेगा की आपको कब तक निवेश कर के रखना हैं।

उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने सोच की फलाना निवेश में हमको 12% का रिटर्न चाहिए , तो अब जैसे ही वो 12% हो जाएगा तो आप उस निवेश को पूरा मान सकते हैं। ऐसा नहीं हैं की आप 12 को 15 या 15 को 18 नहीं कर सकते हैं पर लक्ष्य जरूरी हैं किसी भी निवेश में।

कुछ अन्य tips जिससे आप अपना रिस्क कम कर सकते हैं

  •  Stoploss का उपयोग करिए ताकि आपका कम से कम नुकसान हो।
  • Cost- Averaging करिए
  • अपने portfolio को सुधारते रहिए

अंत में

शेयर मार्केट में निवेश रिस्की हैं, पर ऐसे बहुत से लोग हैं जो शेयर मार्केट से ही पैसे कमा रहे हैं और अमीर बन रहे हैं। आप बाजार के जोखिमों को समझिए और उस हिसाब से अपना निवेश करिए। हर एक इंसान की छमता अलग होती हैं। किसी की कम तो किसी की ज्यादा होती हैं। अगर आप अपने Risk को मैनेज करना सिख गए तो आप बेशक ही शेयर मार्केट से अच्छा पैसा कमा पाएंगे।

उम्मीद करते हैं आपको कुछ जानकारी मिली होगी। अगर आपको फिर भी कुछ समझ में नहीं आता हैं तो आप नीचे कमेन्ट करके पुछ सकते है।

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