Share Market में पैसा लगाने से पहले जाने निवेश के Risks

Share Market Risks

आपने अक्सर TV में या फिर कही प्रचार में सुना होगा “म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं, योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यान से पढ़े”। वैसे ही शेयर बाजार में निवेश भी बाजार जोखिमों के अधीन हैं। कुल मिलाकर ये बात निकल कर सामने आता हैं की शेयर बाजार हो या फिर Mutual Funds दोनों में कुछ ना कुछ रिस्क हैं।

शेयर बाजार में पैसा लगाना एक बहुत ही अच्छा तरीका हैं अपने पैसों को निवेश करने का। इसमें अगर आपने सही से पूरी जानकारी के साथ निवेश किया तो आपको बहुत ज्यादा फायदा हो सकता हैं।

देखिए हर एक निवेश के साथ कुछ ना कुछ रिस्क रहता हैं। रिस्क कम होता हैं तो रिटर्न भी कम मिलता हैं और रिस्क ज्यादा होता हैं तो रिटर्न भी ज्यादा मिलता हैं। शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न के चक्कर में ज्यादा रिस्क लेने से पहले ये जानना जरूरी हैं की शेयर मार्केट में कौन कौन से रिस्क होते हैं। इस लेख में शेयर बाजार में कौन कौन से रिस्क होते हैं उनके बारे में बताया गया हैं। अगर आप Equity Mutual Funds में निवेश करते हैं तो ये लेख उनके risks के बारे में भी हैं।

शेयर बाजार निवेश में रिस्क

अगर आप शेयर बाज़ार में निवेश कर रहे हैं तो आपको मालूम होना चाहिए की शेयर बाजार में रिस्क तो बहुत हैं। आप बस इन रिस्क को कम कर सकते हैं, खत्म नहीं कर सकते हैं। अगर आप बिल्कुल ही रिस्क नहीं लेना चाहते हैं तो आप अपना पैसा Fixed Deposit या सरकारी schemes में निवेश करें। इस तरह से आप अपने रिस्क को बहुत कम कर देंगे पर आपका रिटर्न भी कम हो जायेगा। जो लोग ज्यादा रिटर्न चाहते हैं वो शेयर बाजार में निवेश करते हैं।

शेयर बाजार के कुछ महत्वपूर्ण रिस्क नीचे दिए गए हैं

मार्केट Risk

इसे समझने से पहले ये समझना जरूरी हैं की शेयर बाजार में प्रॉफिट कैसे होता हैं? जब आप कोई शेयर को कम कीमत में खरीद कर ज्यादा कीमत में बेच देते हैं तब आपको प्रॉफिट होता हैं। शेयर मार्केट में जो लगातार कीमतों में उतर चढ़ाओ होता हैं उसे ही मार्केट रिस्क कहते हैं। ये चीज किसी को नहीं मालूम की आने वाले भविष्य में किसी शेयर की कीमत कितनी होगी। सब कुछ एक अनुमानित कीमत पर किया जाता हैं जो की एक रिस्क हैं।

इसके बाद अगर शेयर मार्केट ही पूरा नीचे गिर गया तो आपको तो प्रॉफिट होगा ही नहीं। उदाहरण के लिए जब Corona virus आया था तो बाजार बहुत नीचे गिर गया था। ये भी मार्केट रिस्क ही हैं। कुल मिलाकर आप ये बोल सकते हैं को शेयर बाजार में प्रॉफिट होगा की नही वो एक मार्केट रिस्क हैं।

कंपनी Risk

इसका मतलब ये हैं की आप जिस भी कंपनी में अपना पैसा निवेश कर रहे हैं वो कैसा हैं। देखिए एक आम निवेशक के पास किसी कंपनी की बहुत सारी जानकारी नही रहती हैं। जो भी पता चलता हैं वो बाजार में ही पता चलता हैं। तो कौन सा कंपनी कैसे काम कर रही हैं ये जानना बहुत मुश्किल हो जाता हैं। ये बात जरूर हैं की आपके पास सभी कंपनी की Books of Accounts रहती हैं पर अनेकों financial data को समझना और analyse करना थोड़ा मुश्किल होता हैं।

इसके बाद भी अगर आप सब कुछ समझ रहे है या जानते हैं तो भी आपके पैसे पर आपको रिटर्न मिलेगा की नही ये इस बात पर निर्भर करता हैं की कोई कंपनी कितने प्रॉफिट कमा रही हैं। अगर प्रॉफिट में कमी हुई या फिर कुछ बिजनेस नही चला तो उसका सीधा असर आपके निवेश पर होगा।

सरकारी नियम और कानून वाला Risk

हर एक बिजनेस सरकार के नीतियों द्वारा ही आगे बढ़ती हैं। अब कब कौन सा नियम बदल जाए और रातों रात आपका पैसा डूब जाए कोई नही जानता हैं। उदाहरण के लिए आप हाल में आए गेमिंग इंडस्ट्री के ऊपर 28% का टैक्स देख सकते हैं। अब टैक्स बढ़ने से किसी भी कंपनी के growth में दिक्कत होती ही हैं। इससे कंपनी के प्रॉफिट में अंतर आएगा जिससे आपके रिटर्न कम होंगे।

इसके अलावा मान लीजिए अगर सरकार infrastructure के ऊपर बहुत ध्यान देती हैं तो infrastructure से जुड़ी सारी कंपनी प्रॉफिट में जाने लगेंगी। और एक उदाहरण हैं बैंक का, अगर RBI interest rate कम कर देता है तो बैंक को नुकसान होगा और कही ना कही बैंक की प्रॉफिट कम हो जायेगी। अब ये सारी चीजे सरकार तय करती हैं इसलिए इस पर किसी का ज्यादा जोर नहीं रहता हैं। आप बस इन नीतियों के हिसाब से अपने निवेश को सही से प्लान कर सकते हैं।

Liquidity Risk

ये ज्यादतर ऐसे शेयर में देखा जाता हैं जो लोकप्रिय नही हैं। वैसे किसी कंपनी को भी Liquidity ki समस्या हो सकती हैं। पहले आम लोगों के निवेश के लिए उदाहरण से समझते हैं – मान लीजिए आपने कोई SmallCap कंपनी की शेयर खरीदी और अच्छे खासे प्रॉफिट हो रहे हैं। पर जब आप बेचने जा रहे है तो कोई खरीदार ही नही मिल रहा हैं आपसे उस शेयर को खरीदने के लिए। शेयर मार्केट में तो वही होता हैं, कोई बेचता हैं और कोई खरीदता हैं। किसी का फायदा होता हैं तो किसी का नुकसान।

अब जो ये समस्या आई उसे ही और Professional भाषा में liquidity कहते हैं। अगर आप अपनी मर्जी से किसी चीज को बेच नही पा रहे हैं तो इसका मतलब हुआ की liquidity कम हैं उस चीज की। इससे आप ये समझ सकते हैं की आपको दिक्कत हुई cash जमा करने के लिए या अपने प्रॉफ़िट को बुक करने के लिए।

कम्पनी के लिए ये समस्या बहुत बड़ी बन जाती हैं। ऐसा हो सकता हैं की कंपनी के पास कैश ना हो और वो अपने कर्ज चुकाने के लिए dividends रोक दे। अब अगर Dividends रोक देती हैं तो किसे नुकसान होगा। इसके अलावा शेयर की कीमत भी गिर सकती हैं जिससे आपको ही नुकसान होगा।

Inflation risk

असल में देखा जाए तो ये कोई रिस्क नहीं हैं पर किसी भी निवेशक के लिए ये जानना बहुत जरूरी हैं। हर के समान की कीमत वक्त के साथ बढ़ती हैं, या फिर आप ऐसे बोले की आप जो सामन आज 1 रुपए में खरीद रहे है वो आने वाले समय में आप नही खरीद पाएंगे। चीजों की कीमत में जो बढ़ोतरी हुई उसे ही inflation कहते हैं। हर एक निवेश करने वाले इंसान को अपने निवेश को inflation को नजर में रख कर करनी चाहिए।

Valuation Risks

इसका मतलब ये हैं की आपने अपने पैसे तब निवेश किए जब कोई शेयर अपने सबसे ज्यादा Valuation पर था। PE Ratio से ये पता चलता हैं की कोई शेयर कितना सस्ता हैं। उदाहरण के लिए अगर देखे तो अगर आप SBI का शेयर अगस्त में 620 के आस पास खरीदेंगे तो आपको तो नुकसान ही होगा न। अब इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं हैं की SBI एक खराब बैंक हैं, और बैंक में सब बेकार बेकार चीजे हो रही हैं।

इसका सीधा मतलब ये है की आपको किसी भी शेयर की सही Valuation लगाकर ही उसे खरीदना हैं। शेयर मार्केट में सबसे पहला नियम ही यही हैं “कम में खरीदो और ज्यादा मे बेचो। आप कंपनी की सही Valuation के लिए बहुत सारे Ratios का इस्तेमाल कर सकते हैं। PE Ratio, PB Ratio वैगरा वैगरा।

Growth Risk

कुछ कुछ इंडस्ट्री में growth जल्दी नहीं होता हैं। अब ये ऐसा इसलिए क्यूंकी नए inventions रोज रोज नहीं होते हैं और ना ही नए technology रोज निकलती हैं। उसके अलावा कंपनी में competition भी होता हैं। अगर आपको Industry के बारे में जानकारी हैं तो आप उन कंपनी के शेयर में पैसे निवेश कर सकते हैं। पर अगर आपको जानकारी नहीं हैं तो आप उन shares को दूर से ही टाटा bye bye बोल दीजिए।

EV और AI भी इसी के उदाहरण हैं। अभी लोगों को मालूम नहीं हैं की कंपनी कितना growth करेगी, हाँ ये जरूर मालूम हैं की ये दोनों ही आगे बढ़ेंगी पर एक समय सीमा नहीं मालूम हैं। तो आपको इन दोनों चीजों को ध्यान में रखना हैं निवेश करते समय, growth कितना उम्मीद किया जा सकता हैं और कितने समय में वो कंपनी उसे हासिल करेगी।

अंत में

शेयर मार्केट हो या फिर Mutual fund दोनों ही Equity में निवेश करते हैं। और बात जब Equity मार्केट में निवेश करने की आती हैं तो आपको सभी तरह के risks के बारे में जानकारी होनी ही चाहिए। अब देखिए पैसा आपकी खून पसीने के हैं तो जाहीर सी बात हैं आप उसे गवाना नहीं चाहते हैं। इसलिए बेहतर होगा की आप सभी risks को अच्छे से समझे फिर उसके बाद अपने risk लेने की छमता को समझे। इन दोनों को अच्छे से गहन मंथन के बाद ही शेयर मार्केट में निवेश करे।

उम्मीद करते हैं आपको जानकारी अच्छी लगी होगी और समझ में आई होगी। अगर फिर भी कुछ समझ ना आया हो तो आप नीचे कमेन्ट करके पुछ सकते हैं।

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